Sunday, May 21, 2023

महान ज्ञानी ध्रुव राठी जी,....

 महान ज्ञानी ध्रुव राठी जी,....का जन्म 8 अक्टूबर 1994 को हरियाणा में एक हिंदू जाट परिवार में हुआ

मतलब ,... 

इसके पैदा होने से पहले ,.... कारसेवा आंदोलन हो चुका था ,... 

मुलायम गोली चलवा चुके थे ,... विवादित ढाँचा टूट चुका था ,... 


1990 - 91 - 92 के दंगे हो चुके थे ,... 

1993 का मुंबई बम काण्ड हो चुका था 

इनके पैदा होने से पहले  ही,..... !


जब ये जनाब 5 साल के हुए ,... मतलब 

जब चढ्ढी को बिना हाथ से पकडे चलने के लायक हुए और ABCD सीख रहे थे तब ,... 

देश में अटल जी की सरकार  चुकी थी ,... तकरीबन सब बढ़िया चल रहा था !!


फिर 2002 में जब गोधरा हुआ ,... तो तब ये साहेब थे ,... 

8 साल के ,... 

मतलब ,.. cat mat rat पढ़ रहे थे ,... दूध के दाँत टूटना चालू हुए थे !!

और रहते कहाँ थे ?? हरियाणा में ,... 

हरियाणा जहाँ वैसे भी शांति दूतों की संख्या देश में सबसे कम है ,... और जो हैं वो एक निश्चित इलाके में ,... 


फिर साहेब ,... चले गए जर्मनी बैचलर करने ,... मतलब 17 या 18 साल के ,... 

वहाँ से पढ़ाई की ,.. वहीँ रहे ,... 


फिर आया आम आदमीं पार्टी के बनने का दौर ,... 

जिसमे बहुत सारे ऐसे नवयूवक ,... जो बेरोजगार थे (Engineering के बाद) और इस लायक भी नहीं थे की नौकरी ढूंढ सके ,.. 

उनको आप ने तनखैया नौकर बना लिया थे ,... सोशल मीडिया में हवा बनाने के लिए ,... 

इनको उस वक्त आपने भी तनख्वाह पे ना रखा हो ,... 


खैर ,... 

2015 / 16  के आस पास एक दौर आया ,... जब सारे फर्जी इंजीनियरिंग वाले ,... 

या तो you tuber बनने लगे ,... या फिर standup कमेडियन ,... 

अब रोजी रोटी के लिए कुछ तो करना था ,... 

youtuber का धंधा चुन लिया !!


अब उस वक्त ,... जिसका राजनीति में जरा भी इंटरेस्ट था ,... और youtuber था ,.. 

उसके पास दो रास्ते थे ज्यादा से ज्यादा फॉलोवर पाने के ,... 

एक ,... हर हर मोदी - घर घर मोदी ,... 

दुसरे ,... बाल नरेंद्र tails वाले ,... 


अब पहले रास्ते पर,.. उस वक्त बहुत भीड़ थी - tuff compition था ,... 

शायद इसलिए ,... जनाब ने दूसरा रास्ता चुन लिया ,... 


दूसरा रास्ता चुनते ही ,... कुछ (लेफ्टिस्ट / ज्ञानी / कथित सेक्युलर) गिद्धों की नजर पड़ी और ,... 

और ,... वो जर्मनी में रहने वाला ,... ध्रुव राठी ,... अन्धो की लकड़ी बन गया ,... 

youtube चैनल चल निकला ,... धन वर्षा होने लगी ,.. तो ,.. 

तो अब धंधे से कैसे धोखा करें - पापी पेट का सवाल है ,... काम बदस्तूर जारी है !!


वैसे ,.. 

ध्रुव राठी जी को हम कुछ महीने सपत्नीक ,.... कानपुर के चमनगंज या दिल्ली के जामिया नगर जैसे इलाके में एक महीने के प्रवास का प्रस्ताव देते है और उस प्रवास का पूरा खर्च हम उठा लेंगे !!


एक महीने बाद ,.. 

एक महीने बाद ,... अगर ध्रुव राठी को गूगल सर्च करने में ,... 

अलग तरह का data / stats ना मिलने लगे तो ,... 

तो अपना बांकी जीवन ,.. इनके लिए मुफ्त में excel बनाते रहेंगे !!


रही बात हमारी,.. तो हम उल्लू थे ,.. उल्लू हैं और हाँ ,... Rathee is a resident of Germany. In November 2021, Rathee married his long-time girlfriend Juli Lbr ,... दोनों के लिए राठी जी को congratulations !!

Sunday, January 31, 2021

कहाँ है लब आजाद किसी के ?

 ना तेरे ना मेरे - कहाँ है लब आजाद किसी के ?

हर काम में व्यापार जुड़ा ,... हर व्यवहार में है स्वार्थ जुड़ा ,... 

स्वार्थ क्या धन सिर्फ ?,... क्या स्वार्थ बड़े होने का नहीं ?

क्या स्वार्थ ज्ञानी दिखने का नहीं ??


मान लिया वर्तमान ही सच ,... पर इतिहास में क्या मिटटी डालें ?? और कब तक हम मिट्टी डालें ?

जो आज हुआ ,... होगा,... इतिहास वो कल ,.. 

कल फिर - बोलोगे ,... 

इतिहास को लेके रोना क्या ,... इतिहास को लेके लड़ना क्या ??


दोस्त मेरे ,... मिथ्या है ये ,... 

बता,... वर्तमान इतिहास से जुदा है कैसे ??

क्या मूल - फूल का साथ नहीं ? इस शूल में क्या बीज का होइ हाँथ नहीं ??


वर्तमान तेरा - इतिहास रचा ,... 

मत भूल तेरा इतिहास कभी,.... 


हर बार ,... एक नया घाव तू खायेगा ,...

पहले से गहरा ,.. पहले से पीड़ादायक ,...  

घाव - घाव का मर्ज बने ?? कौन सा ज्ञान बताये इसे सही ??

ज्ञानी बन,...  जो रिसते घाव को इतिहास बतायेगा,... 

खुद ही इतिहास बन जायेगा ,... 


जो जीतेगा ,... वो मिटा के नामो निशां तेरी कुर्बानी के ,... खुद को ,... सिकंदर बतायेगा ,... 


यदि है लब आजाद तेरे ,... 

तो बोल ,... तो बोल जंग कब शुरू हुई??,.... तो बोल जंग क्यों शुरू हुई ??

#NagShukl

Monday, January 25, 2021

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ,... "किसान आंदोलन पर मेरे विचार",...

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ,... "किसान आंदोलन पर मेरे विचार",... 

लेख थोड़ा लम्बा है - क्योंकि आंदोलन भी लम्बा हो चुका और सरकार - किसान की वार्ता भी भी लम्बी हो चुकी !!

जो देश कृषि प्रधान देश हो ,.... जिस देश में सीमा पे जवान - संसद में बैठा नेता - दफ्तर में बैठा अधिकारी,.... सभी किसान के बेटे होने का दावा करने में गर्व महसूस करते हों ,... उस देश में ,... 

उस देश में - ऐसा क्यों ?? की उस देश के गणतंत्र दिवस पर ही - किसानो को अपनी माँगो/बातों  के लिए सरकार को - दुनिया को समझाने के लिए राजधानी में परेड करनी पड़े ??

ऐसा क्यों ? 

वैसे हमारे देश में किसान - वास्तव में हम सभी के दिलों के करीब है बहुत करीब - हम सभी किसी ना किसी रूप से खेती किसानी से जुड़े रहे है और कुछ भी बन जाने के बाद भी ,... हम सब के दिल में एक दबी - छुपी इच्छा - अपने खेत - जमीन और किसानी की बनी ही रहती है ,... 

ऐसे देश में - भला कौन,.... किसानो के खिलाफ बोलने की हिमाकत करेगा ?

ऐसा कैसे ,... की कोई सरकार - कोई राजनीतिक पार्टी ,... किसानो की बात ना मानने पर अड़ जायें ??

इतनी हिम्मत - इतनी हिमाकत सरकार में - राजीनीतिक दल में कहाँ से आयी ??

इससे भी बड़ी जिज्ञासा का विषय ये है की ,... 

सर्दी के इस महीने में - जब किसान पिछले 2 महीने से,.... कुहरे - बारिश - सर्द हवाओं के बीच खुले आसमान के नीचे सड़को पर पड़ा हो ,... और ,... 

और बांकी देश सोता रहे ?? बाकी देश अपने ढर्रे पे चलता रहे है ?? ऐसा कैसे ??

जिस देश में किसान सभी की भावनाओं के करीब है - उस देश में ,...2 महीने का किसान आंदोलन - "जन-आंदोलन" क्यों नहीं बन पाया ??

अगर ये जन-आंदोलन नहीं बन पाया तो इसका एक ही कारण हो सकता है की,... 

की जनता का एक बड़ा हिस्सा - किसानो की मांग से सहमत नहीं या इन मांगो को व्यवहारिक नहीं मानता !!

चूँकि ,... ये हकीकत है की किसान सभी के दिलों के करीब है ,... इसलिए आम जनता ,... किसानों से सहमत ना होते हुए भी उनके खिलाफ या विरोध में नहीं है.

आम जनता की यही दुविधा ,... 

सरकार को,.... सम्बल दे रही है की वो भी किसानों की तरह अपने रुख पर अड़े रहे..... 

तो अब ,... तो अब ये तो समझ आ रहा है की ,... 

किसको - कहाँ से ताकत मिल रही है.

खैर ,...इस मामले में हमारी समझ क्या है ,... प्रस्तुत करने की हिम्मत जुटा रहे है ,.... 

मेरी समझ से किसानों की मांग ,... की MSP को हर जगह लागू करने पर बाध्य किया जाये ,.... 

मेरी समझ से "पूर्णतया अव्यवहारिक" है ,... 

और यही वो माँग है जहाँ पर सारा विमर्श टिका है। 

बेशक MSP की मांग से किसानो का सीधा हित है ,... परन्तु ये संभव नहीं यदि ऐसा हुआ तो किसानों का MSP उत्पाद बाजार में बिक ही नहीं पायेगा,.. क्योंकि ऐसे में खाद्य  सामग्री के दाम नियंत्रित रखने में ,... खाद्य प्रसंस्करण (Food processing) कंपनी अनाज के आयात पर जोर देंगी और सरकार ,... 

और सरकार ,... कितना खरीदेगी ?? 

वैसे आज भी कितना खरीद रही है ??

वैसे मेरी बुद्धि के हिसाब से ,.... 

इन बिलों के बाद ,... ये बिलकुल सत्य है की हरियाणा - पंजाब से भी मंडियाँ ठीक उप्र - बिहार की तरह से ख़त्म हो जायेंगी ,... फिर ,... 

फिर क्या हरियाणा - पंजाब का किसान भी ,... उप्र - बिहार - उड़ीसा - मप्र - छत्तीसगढ़ आदि ,... के किसानों की तरह गरीब हो जायेगा ??

शायद यही चिंता है हरियाणा - पंजाब के किसानों की ,... जो उन्हें इस आंदोलन के लिए उत्प्रेरक का काम कर रही है,... 

इस मामले में मेरा विचार ये है की ,... 

साल - दो साल के बाद जब हरियाणा - पंजाब से मंडियां ख़त्म हो जायेंगी - तब ,... 

तब ,... 

हरियाणा - पंजाब के किसानों का ,... मोहभंग होगा गेंहूँ और चावल की खेती से ,...तब,..

और तब ,... ये किसान,.... हरियाणा पंजाब के किसान,... 

"जो धन संपन्न है - साधन संपन्न है ,... आयात निर्यात ,... रुपये - डॉलर आदि को अच्छे से समझते है",... 

मजबूरन गेंहूँ - चावल छोड़ ,... कुछ cash crops जैसे ,... स्ट्रॉबेरी, अवकार्डो, स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न आदि-इत्यादि  जिनका निर्यात किया जा सके की तरफ ध्यान देंगे और ,.. 

मेरी समझ से ,... ऐसा करने में हरियाणा - पंजाब के किसानों को अप्रत्याशित सफलता मिलेगी और इनकी सफलता पर कोई संदेह इसलिए भी नहीं क्योंकि इनके पास वो सभी ज्ञान और साधन उपलब्ध है ,.. जो सफलता के लिए चाहिए,... 

ये निश्चित है की इनके हाल आज से बेहतर होंगे !!

दूसरी तरफ ,... जब इन किसानों का गेंहू - चावल से मोहभंग होगा,.. तब झारखंड - छतीशगढ - मप्र - उप्र - उड़ीसा आदि के किसानो को ,... गेंहू चावल पर - आज से बेहतर दाम मिलने की संभावना प्रबल होगी !!

और इस वजह से मुझे नहीं लगता MSP की माँग मानी जा सकती है ,... मेरी समझ से बिल्कुल भी नहीं !!

ये तो था इसका आर्थिक पहलू ,... अब राजनीतिक पहलू की बात करते है ,... 

किसान बिलों को वापस ना ले के ,... सरकार ,.. 

बेशक हरियाणा - पंजाब के किसानों का समर्थन खो देगी और निश्चित रूप से वहाँ की अपनी सीटें भी ,... लेकिन ,... 

लेकिन इसी की वजह से वो परोक्ष रूप से ही सही - बांकी कम से कम 10/12 राज्यों के किसानों की - हितैषी होने का दम्भ भरेगी 

और ऐसे हाल में ,.. उसे राजनीतिक नुकसान की जगह फायदा ही दिख रहा है तो ,... 

तो अब पक्का है की ,... सरकार बिल वापस लेने से रही - MSP तय करने से रही !!

अब अंत में ,.. बता दें ये सब लिखते समय जब हम देश के किसानों का विभाजन कर रहे थे ,... 

हरियाणा - पंजाब के किसान और बाँकी  देश के किसान ,... तब ,... 

तब यकीन मानो दोस्त ,... बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था ऐसा कोई विभाजन करने  पर ,... पर,... 

पर सच तो ये है की ,... 

MSP और मंडियों की खरीद पर ,... हमारे देश का किसान तो पहले से ही विभाजित था ,... 

और ये विभाजन - कब और किसने किया था ,... इसका हमें कोई पता नहीं !!

#NagShukl

Monday, November 30, 2020

किसान बिल - अच्छा है की बुरा ,...

किसान बिल - अच्छा है की बुरा ,... ये कहने की समझ नहीं है मुझमे पर ,... 

पर जो पता है,... वो ये,...की हमारे दादा / नाना एक कहावत कहते थे ,... 

"उत्तम खेती मध्यम बान,.... निषिद चाकरी भीख निदान"

इस कहावत के हिसाब से ,... खेती सर्वोत्तम थी और चाकरी (नौकरी) निम्नतम।

लेकिन अब विकास के साथ साथ ,... ये कहावत एकदम गलत सिद्ध हो रही है ,... आज की हकीकत यही है की,.. 

की खेती किसानी,... दिहाड़ी मजदूरी के सामने भी,.. कहीं नहीं टिकती। 

हमें अच्छे से याद है,... 

जब गेंहू का दाम पाँच/छह रुपये किलो था तब ,... तब गाँव में दिहाड़ी मजदूरी 40 - 50 रुपये थी 

अब ,... 

अब दिहाड़ी मजदूरी 500 के करीब तो ,... तो इस हिसाब से गेंहूँ की कीमत 50 - 60 होनी चाहिए थी ,... 

लेकिन आज गेंहू की कीमत क्या है ,... ये आप सबको पता है 

पता है की नहीं पता है ?? पता है ना ??

ना ना ,... वो कीमत नहीं - जिस पर आप खरीदते हो ,.... 

अरे दोस्त हम उस कीमत की बात कर रहे है जिस पर किसान को बेंचना पड़ता है। 

किसान के बेंचने की कीमत ,.... 

अलग अलग राज्यों में ,... बल्कि अलग अलग जिलों में - अलग अलग है ,... 

लेकिन एक बात जो सब जगह सही है वो ये की ,.... पूरे देश में कहीं भी गेंहूँ का दाम सरकार द्वारा तय MSP से ज्यादा नहीं है ,... 

MSP ,... MSP सिर्फ हरियाणा पंजाब के किसानो को ही मिल पाती है ,... हमने हमारे गाँव के आस पास तो कभी MSP या मंडी का नाम भी नहीं सुना था 

लेकिन ,... 

लेकिन सवाल MSP के मिलने ना मिलने का नहीं है ,... सवाल है खेती किसानी - किसानों के हालात सुधारने का ?? वो कैसे सुधरेंगे ??

हमारी पारम्परिक खेती के माध्यम से तो ये ,.... दिहाड़ी मजदूरी से भी बुरी तरह पिछड़ती है ,... 

हालत सुधारने के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा ,... पर ,.. क्या वो कुछ ना कुछ इन "किसान बिलों" से संभव है ??

सरसरी नजर से देंखे तो शायद नहीं ,.. शायद क्या बिलकुल नहीं। 

पर ,... 

पर जिस तरह से दूध से मख्खन निकालने के लिए उसे बिलौना होता है उसी तरह से ,.... खेती से मख़्कन निकालने के लिए पारम्परिक तरीके को भी बिलौना पड़ेगा ,... 

बिलोते - बिलोते ,... कहीं ना कहीं मख्खन निकलेगा जरूर ,.... 

मेरा समर्थन किसान बिल को इस लिहाज से है की ,... 

की ये खेती को बिलोना है ,... और मेरा जो विरोध किसान बिलों से है वो ये की ,... 

इसमें ,... कोई न्यूनतम दाम की व्यवस्था नहीं ,... और बिना न्यूनतम दाम के ,... बड़े बड़े व्यवसाई /व्यापारी ,... किसानो का वही हाल करेंगे ,... जैसे ,.. 

जैसी आपके पास की आटा पीसने वाली चक्की की ,... पैकेट बंद आटे ने ,... 

जैसी टकटकाते टाइप राइटर की ,.... कंप्यूटर ने की ,... 

जैसी नोकिया के लोहालाट मोबाईल की ,... टच स्क्रीन मोबाईल ने की ,... 

खतरा तो है ,... पर खतरा किस बात का है ??

खतरा है भविष्य की अनिश्चितता का ,... परन्तु सच है की ,... ढर्रे पर चलती व्यवस्था भी खतरा ही है ,... 

तो ,... 

तो एक तरफ कुआँ है दूसरी तरफ खाई ,.... 

किसान बिल का समर्थन या विरोध करने से पहले ,... ये जरूर सोंचना ,... 

भविष्य में अनिश्चितता तो है - पर ढर्रे पर चलती व्यव्य्स्था का अंजाम सुनिश्चित है। 

अंत में साफ़ कर दें की ,.. किसान बिल को मेरा समर्थन तो है ,... लेकिन न्यूनतम खरीद दाम एक माँग भी। 

अंत में दादा जी की एक और कहावत सुना दें ,... 

"खेती उत्तम काज है,,... इहि सम और न होय,... 

खाबे कों सबकों मिलै,... खेती कीजे सोय॥"

खेती सर्वोत्तम कार्य है, इसके बराबर कुछ और नहीं,... यह सबको भोजन देती है किसी को (ना सिर्फ मनुष्य वरन पशु - पक्षी जीव जंतु) भूखा नहीं रहने देती,.. इसलिये खेती करनी चाहिये।

#NagShukl 




Friday, April 24, 2020

#परशुराम_जयंती

ब्राम्हण कोई जाति नहीं - एक कर्म है ,....
हमने देखा है दलितों में ,.... अनेक ब्राम्हण ,... और ब्राम्हणों (कुल आधारित) में अनेक दलितों को ,....
ब्राह्मण होने के लिए शिक्षा, दीक्षा और कठिन तप आवश्यक है,.... इसके बाद ही किसी को ब्राह्मण कहा जा सकता है !!
जिन लोगों ने ब्राह्मणत्व को अपने कठिन तप वा अथक प्रयासों से हासिल किया,..... उनके कुल में जन्मे लोग खुद को ब्राह्मण समझने लगे और समाज अपनी सुविधानुसार उनको मान्यता देने लगा !!
ब्राम्हणो की वो संतानें भी खुद को ब्राह्मण मानने लगी,... जिन्होंने न तो विद्या ली, न दीक्षा और न ही कोई तप किया,...
यहाँ तक की ,.... वो जनेऊ,....शिखा (चोटी) ,... गायत्री मन्त्र ,... संयमित जीवन से भी दूर रहे,... पर ,....
पर उन्होंने ,... और ब्राम्हण विरोधी समाज ने ,... ऐसे लोगो को ब्राम्हण होने की मान्यता दी !!
ऐसी मान्यता देने में ,... दोनों का स्वार्थ निहित था ,...
एक जिनको ब्रम्हाण होने का सम्मान मुफ्त में चाहिए था ,...
दूसरा जिसे ब्रम्हाण को हर हाल में ,... गाली दे अपनी कुंठा को मिटाना था !!
ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या :
जो ब्रह्म (ईश्वर) को छोड़कर किसी अन्य को नहीं पूजता,.... वह ब्राह्मण,..
जो पुरोहिताई करके अपनी जीविका चलाता है,.....वह ब्राह्मण नहीं, याचक है।
जो ज्योतिषी या नक्षत्र विद्या से अपनी जीविका चलाता है,..... वह ब्राह्मण नहीं, ज्योतिषी है
जो कथा बांचता है वह ब्राह्मण नहीं,.... कथा वाचक है।
इस तरह जो समाज को तात्कालिक परिस्थियों में दिशा दिखाने के सिवाय ,.... कुछ भी कर्म करता है वह ब्राह्मण नहीं,...
ब्राह्मण होने का अधिकार सभी चाहते है ,... ब्राह्मण होने का कर्तव्य पालन करने वाले विरले ही है
ब्राम्हण ,... वो है ,... जो सर्वशक्तिमान भी है और निरीह भी ,...
ब्राम्हण,... वो जिसके पास सब कुछ है ,.... पर अपने लिए कुछ भी नहीं !!
ब्राम्हणत्व के इसी मानक को स्थापित किया ,.... भगवान् परशुराम ने !!
आज के समय में ,... वो कोई भी जो अपने आप को ब्राम्हण कहने की सोंचता भी हो ,...
सुनिश्चित करे की ,.... वो कम से कम ,.. जनेऊ - शिखा - हनुमान चालीसा - गायत्री मन्त्र का पालन करता हो !!
#NagShukl #परशुराम_जयंती
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Sunday, March 24, 2019

एक दृश्य - जो आँखों से देखा ,....

एक दृश्य - जो आँखों से देखा ,....
इस बार - होली के अवसर में ,... हम बैंगलोर के एक ऐसे इलाके में थे ,... जहाँ बहुलता में मुस्लिम है !!,...
खैर इस इलाके में ,... कुछ - कुछ ,... ईसाई भी है ,...
परन्तु ,... चूँकि -
धर्म परिवर्तन कराने की दौड़ में ,.... इस्लाम - क्रिश्चियनिटी से जीत गया तो ,...
तो ये इलाका ,... मुस्लिम बहुल और ईसाई दुसरे नंबर के - निवासी है !!

खैर ,.... अब होली का दृश्य ,...
होली का दिन ,... दोपहर की नमाज का वक्त ,...
कुछ ,... बच्चे सड़क के एक चौराहे पर,....
"आते - जाते लोगो को ,....ये याद दिलाने के प्रयास में ,... की आज होली है",...
अर्थात ,.. कुछ उंगलियों पर गिने जाने वाली संख्या के - बाहरी बच्चे जो पढ़ने के लिए ,.. यहाँ बने PG में रहते है - होली खेल रहे थे !!
नमाज का वक्त ,.. पास रहने वाले ,...
सज्जाद - रफीक - अब्दुल भाई ,... बड़ी शान से ,... सफ़ेद ,...
सफ़ेद कुर्ते में ,... चौराहे से जब गुजरे तो ,..
तो अचानक ,... होली खेलते हाँथ रुक गए !!,... थोड़ी देर के लिए समय रुक गया ,....
जैसे ,.. शहंशाह की सवारी निकल रही है ,...
सड़क किनारे - अदब से खड़े रहो ,... क्योंकि रंग के कुछ छींटे - अगर ,.. शहंशाह के दामन पर पड़ गए तो ,...
तो ,..
शहंशाह का - मजहब खतरे में पड़ जायेगा !!,...
खैर ,..
सवारी अब गुजर चुकी थी ,... अब एक बार से - हांथो में बिजली की तेजी वापस आयी और ,...
ये क्या ,... छपाक से ,...
छपाक से ,.. एक गुब्बारा मेरी ,... सफ़ेद टी-शर्ट में गिरा ,...
इस गुब्बारे की ,.. मेरी सफ़ेद शर्ट में,.. फटने की हिम्मत शायद - इसलिये पड़ी - क्योंकि ,...
शर्ट तो सफ़ेद थी ,... पर सर पर टोपी नहीं थी !!
देश में - जब हम सब रंगो को मिला के रखने की बात करते है तो ,...
तो होली में ,... सफ़ेद जुदा क्यों रहना चाहता है ?? या गर सच कहें तो ,...
तो हमारे नेता ,..
हमारे नेता ,... होली में इस सफ़ेद को - जुदा क्यों रखना चाहते है ??
खैर ,...
गुब्बारे ने सज्जाद - रफीक और अब्दुल से दूरी बनाये रखी ,.. मगर ,..
मगर ,... रमजान - तौफीक - अहमद ,... ने खुद ही गुब्बारों के बीच जा - उन्हें अपने ऊपर फटने के लिए कहा ,...
तो ,.. तो शायद ,...
वो शहंशाह है ,.. जिनके सफ़ेद रंग को ,... होली के रंग से खतरा है ,.. पर ,..
पर,...
ये "रमजान - तौफीक - अहमद " अभी अभी हाल ही में ,.. इस शाही खानदान में शामिल किये या कराये गये - तो ,..
तो इनका मन ,.. मचल गया ,... होली के गुब्बारे को !!
कहानी नहीं - हकीकत है ,.. जो देखी - इस बार - होली के दिन !! #NagShukl

Thursday, November 22, 2018

जब मकान हमारे कच्चे थे,...रिश्ते सारे पक्के थे

दादी माँ बनाती थी.. रोटी !!
पहली.. गाय की ,
और आखरी.. कुत्ते की..!
हर सुबह.. नन्दी आ जाता था ,
दरवाज़े पर.. गुड़ की डली के लिए..!

कबूतर का.. चुग्गा ,
चीटियों.. का आटा..!
शनिवार, अमावस, पूर्णिमा का सीधा.. सरसों का तेल ,
गली में.. काली कुतिया के ब्याने पर.. चने गुड़ का प्रसाद..!
सब कुछ.. निकल आता था !
वो भी उस घर से..,
जिसमें.. भोग विलास के नाम पर.. एक टेबल फैन भी न था..!
आज..
सामान से.. भरे घरों में..
कुछ भी.. नहीं निकलता !
सिवाय लड़ने की.. कर्कश आवाजों के.!
....हमको आज भी याद है -
मकान चाहे.. कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे.. सच्चे थे..!!
चारपाई पर.. बैठते थे ,
दिल में प्रेम से.. रहते थे..!
सोफे और डबल बैड.. क्या आ गए ?
दूरियां हमारी.. बढा गए..!
छतों पर.. सब सोते थे !
बात बतंगड.. खूब होते थे..!
आंगन में.. वृक्ष थे ,
सांझे.. सबके सुख दुख थे..!
दरवाजा खुला रहता था ,
राही भी.. आ बैठता था...!
कौवे छत पर.. कांवते थे
मेहमान भी.. आते जाते थे...!
एक साइकिल ही.. पास था ,
फिर भी.. मेल जोल का वास था..!
रिश्ते.. सभी निभाते थे ,
रूठते थे , और मनाते थे...!
पैसा.. चाहे कम था ,
फिर भी..
माथे पे.. ना कोई गम था..!
मकान चाहे.. कच्चे थे ,
पर..रिश्ते सारे सच्चे थे..!!
अब शायद..सब कुछ पा लिया है !
पर..
लगता है कि.. बहुत कुछ गंवा दिया!!!

Saturday, November 10, 2018

भाई हाफ़िज़ हो गया है ,....

भाई हाफ़िज़ हो गया है ,....
जगह बैंगलोर ,.... नाम शाहिदा ,.... भाई का नाम जुनैद ,.. पिता रज्जाक ,....
घर के पास ,... एक दुकान में लॉन्ड्री चलाते है ,.... काम काफी रहता है,..
आज दुकान पहुँच,.. कपडे उठाने,.. तो ,...
तो कपड़ों की तह,... कुछ अलग तरह से लगी थी ,.. पूँछा
किसने करे ,.... बोली भाई ने ,... पापा गाँव गये है ,..
वो थोड़ा ,.. सहमी हुई सी,... बोली -
अगर ठीक नहीं बने तो दुबारा कर देती हूँ ,... हमने कहा ,..
कपडे ही तो है ,... क्या फर्क पड़ता है ,.. छोड़ो !!
खैर - करे किसने थे ?? वो बोली ,.. भाई ने ,...
पूँछा ,.. अच्छा वो स्कूल जाता है ,... बोली नहीं ,... वो तो हाफ़िज़ हो गया है ,....
हमने कहा ,... हाफ़िज़????,.. अरे कितनी क्लास में ,...
उसने कहा,.. वो हाफ़िज़ हो गया है ,...
(हमने मतलब निकाला - शायद सारी कक्षा पास कर के - पारंगत हो गया है ,... पता नहीं,..सही की गलत )
खैर हमने आगे पूँछा ,... तुम स्कूल जाती हो ,...
वो बोली हाँ ,... हमने कहा तुम कौन सी क्लास में ??
वो बोली नहीं उर्दू स्कूल में ,... हमने कहा उर्दू स्कूल - मतलब मदरसा ??
वो बोली - नहीं उर्दू स्कूल ,...
हमने कहा ,.. अच्छा तुम्हारी कौन सी क्लास ,...
जवाब फिर वही ,.. उर्दू स्कूल ,...
हमने कहा ,... अच्छा पहाड़े आते हैं ??,... वो थोड़े अचरज सी हंसी ,...
हमने कहा ,.. पहाड़े मतलब ,... table ,.. बोली नहीं ,.. बस थोड़ा मुस्काती रही ,...
आगे हमने पूँछा ,... अच्छा पैसे कितने देने है बोली ,... 4 कम 100 ,..
हमने मन में ,.. पहाड़े तो इसको ,... जिंदगी ने सीखा दिए है ,..
स्कूल तो बस धोखा दे रहा है ,....
सोचते हुए ,... कपडे ले ,.. घर आ गए ,... और ,...
तुरंत आप सभी को बता दिया ,..
वैसे ,.. हाफ़िज़ का मतलब जो हमने समझा ,.. सही की गलत ??
और एक बात ,.. अच्छे अच्छे ,.. इंटरनेशनल स्कूल के,... इस उम्र के बच्चे ,... ना बता पायेंगे ,...
एक कपडे के 8 रूपये ,... कुल १२ कपडे तो पैसे कित्ते ??,...
सच है ,... जिंदगी ,... सबसे बड़ी गुरु है !! और स्कूल चाहे ये हों या वो हो ,... बस धोखा ही दे रहे है !! #NagShukl

Sunday, September 9, 2018

उस दिन की ही तो बात है ,....

उस दिन की ही तो बात है ,....
गर्मी की छुट्टी थी ,... दोपहर का समय ,..... गूलर का पेड़ और उसकी छाँव में - वो 5 नंबर का पत्थर ही तो था ,....
जिसपे कुछ बैठे थे ,... कुछ सामने दीवार से सटे खड़े थे ,... और कुछ उधर दीवार पर टेक ले खड़े थे ,..
शायद बिजली आ नहीं रही थी ,... धुप तेज़ थी,... लू भी ,.... आह स्वर्ग
हम्म्म ,.... स्वर्ग ,..
स्वर्ग क्या ???,....ओय ,... स्वर्ग वही था उल्लू !!

कोरा कागज़ ,...

कभी कभी सोंचता हूँ - लिख के ,.... ये लिख क्या दिया??,...
फिर ,.. मिटा के सोंचता हूँ ,... लिखा ही था तो मिटाया क्यों ??
लिख के मिटा तो दिया ,.. पर ,..
पर वो कागज़ - जो कोरा था ,... अब कोरा कहाँ ??
करूँ उस कागज़ को - कोरा कैसे ??
शायद वो कागज़ - कोरा ही महान है ,... जीने का आसार है ,....
उसी में है - लिखने की सम्भावनाएं अपार!
जो लिख गया ,... वो बिकेगा एक दिन,...
पान में लिपट,... या ,...
या मिलेगा किसी दिन ,.... समोसे के नीचे !!
कागज़ - जो कोरा है ,....
एक खुला आसमान,... धरती विशाल ,..... गहरा समंदर ,... उड़ता पंक्षी ,.. गमले की तुलसी,.... जंगल का बरगद ,...
मोहल्ले का गूलर ,... बुधई की नीम ,... नीम पर गिल्लू ,... वो क्या हो सकता है ,...
वो क्या - नहीं हो सकता ??,...
पर हो कुछ भी ,.. मिटना तो उसे भी है ,....
मिलेगा वो भी कभी ,.... यहाँ या वहाँ ,...
लिखा हो - ना लिखा हो ,.... अंत सभी का एक है ,...
जो लिखा है ,.. शायद उसे सुकूँ है - किसी ने तो पढ़ा है ,... पर दुःख शायद ,..
जो लिखा है - उसे समझा कहाँ ??
समझा नहीं शायद उसने - है कोरा कागज पास जिसके !!#NagShukl

Sunday, September 2, 2018

भगवान् श्री कृष्ण ,....

भगवान् श्री कृष्ण ,....
भगवान् श्री कृष्ण ,.... जब युद्ध से पहले दुर्योधन को समझाने गये ,... की तुम्हे ऐसे काम नहीं करने चाहिये - जिनसे युद्ध हो ,...
धर्म और अधर्म को समझो ,... जो तुमने किया वो गलत था ,.... जो तुम कर रहे हो वो भी ,....
तब ,..
तब दुर्योधन ने कहा ,...
माधव ,... धर्म क्या है - अधर्म क्या ,... सही गलत का - ज्ञान है मुझे ,...
बस दिक्कत इतनी है ,... की ,...

की धर्म का मार्ग पकड़ने की मेरी इच्छा नहीं और ,.. इस अधर्म का आनंद मैं त्याग सकता नहीं ,....
ये कुछ वैसा है ,... जैसे हम अपने दोस्त को समझायें ,...
सुन ,. गुटखा मत खाया कर ,... प्लीज़ दारू मत पियो ,.... और वो जवाब दे ,...
"अबे ज्ञान मत दे मुझे ,... सब पता है",...
खैर ,...
मतलब सिर्फ इतना है की ,...
की जब हम गलत कर रहे होते है ,... हमें अच्छी तरह ज्ञात होता है ,...
"हम गलत कर रहे है",....
और गलत कर देते है ,... जानते हुए की गलत है ,.... अर्थात ,...
गलत हम ,... जानबूझ कर करते है ,....
जो जानबूझ कर की गयी - गलतियाँ ,.... अक्षम्य है !!,...
और अक्षम्य का - दंड अनिवार्य है ,.... जो मिलता है और मिलेगा अवश्य !!,..
अंतिम बात - बस इतनी है की ,...
की वो क्या है ,...
वो क्या है जो हमें - जानबूझ कर गलत करने को मजबूर करता है ???
वो है हमारा ,... काम - क्रोध - मद - लोभ ,.....
जो मात्र इसलिए ,... क्योंकि - उस वक्त अपनी इन्द्रयों के स्वामी बनने की जगह - दास बन गए ,.... तो
तो ,... यदि मोक्ष पाने का रास्ता ,... धर्म है (जो सिद्ध है) तो ,...
तो मोक्ष पाने ,... उपकरण - कर्म ,... मात्र एक है ,...
मात्र एक ,.... और वो है ,... इन्द्रियों पर विजय !!,....
शायद - यही गीता का ज्ञान है ,... की,...
की मोक्ष आसान है ,... और ,... और है तुम्हारे हाथ ,....
खैर छोड़ो ,... मेरा क्या ,.. मैं तो पौधा हूँ ,...

प्रैक्टिकल गीता ज्ञान ,....
गीता का सार ,... वैसे तो गीता का सार बता पाने की क्षमता,... शायद हम मनुष्यो में है ही नहीं ,....
फिर भी ,... कुछ महामानव अपनी अपनी - समझ के अनुसार कुछ न कुछ बता ही देते है ,.. तो ,..
पहली बात ,...
पहली बात तो ये की ,... जो सबसे प्रचलित गीता सार है ,.... वो है की ,..
"कर्म करो - फल की चिंता किये बिना",...
देखा जाये तो कितना सटीक है ,... यदि आप फल चिंता करेंगे - तभी कर्म से आसक्ति उतपन्न होगी ,.. तभी दुःख होगा - तभी सुख होगा और मोक्ष ,..
और मोक्ष,...
मोक्ष दुःख - सुख से परे,... की ही स्थिति,.. का ही नाम है ,....
खैर ,... अब व्यवहारिक बात ,...
यदि फेसबुक पर पोस्ट करते ,... ट्विटर पर ट्वीट करते ,... हम ये सोंचना छोड़ पायें ,..
इसे कितने लाइक, शेयर, रीट्वीट, कमेंट मिलेगा ,... कौन इसको लाइक करेगा - कौन कमेंट ,...
किसको इससे फायदा होगा - किसको इससे नुक्सान ,...
तभी ,...
हाँ तभी ,.. और सिर्फ तभी ,...
हम वो लिख पायेंगे जो हमारे मन का सत्य है ,....
और मोक्ष ,....
मोक्ष तो मात्र सत्य में है - धर्म में है !!,..
छोड़ो ,... मेरा क्या - मैं तो पौधा हूँ ,... चलो बोलो ,..
"जय श्री कृष्ण",...
श्री कृष्ण गोविन्द - हरे मुरारी ,... हे नाथ नारायण वासुदेवा !! #Nagshukl

मैं ब्राम्हण हूं

मैं ब्राम्हण हूं
जब मैं पढ़ता हूँ और पढ़ाता हूँ
मैं क्षत्रिय हूँ
जब मैं अपने परिवार की रक्षा करता हूँ
मैं वैश्य हूँ
जब मैं अपने घर का प्रबंधन करता हूँ
मैं शूद्र हूँ
जब मैं अपना घर साफ रखता हूँ
ये सब मेरे भीतर हैं, इन सबके सयोजन से मैं बना हूँ

वस्त्तुतः सच यही है कि हम सुबह से रात तक इन चारो वर्णो के बीच बदलते रहते हैं।

अंग्रेजों में ,.... जो सोने का काम करता है वो Goldsmith है ,....
हिन्दुस्तान में ,.... वो सुनार है ,....
और ,...
अंग्रेजों में ,.... जो भेड़चारता है वो Shepard है ,....
हिन्दुस्तान में ,.. वो गडरिया ,....
कौन,... है कौन???- जो कहता है ,....

हिन्दू में - हिन्दुस्तान में ,.... जातिवाद है ???
गर है तो ,..
तो,... निश्चित रूप से वही है ,... जो सब जगह है ,...
preacher + Teacher = ब्राम्हण Isn't it??

Tuesday, March 20, 2018

Collection

“मैं गया था सोच के, बातें बचपन की होंगी, दोस्त मुझे अपनी तरक़्क़ी सुनाने लगे।”

किसको बर्दाश्त है "साहेब" तरक़्क़ी आजकल दुसरो की लोग तो मय्यत की भीड़ देखकर भी जल जाते है

"वो दोस्त मेरी नज़र में बहुत ‘माईने’ रखते है, जो वक़्त आने पर मेरे सामने ‘आईने’ रखते हैं।"

आँखें ही थी जो कह गयी सब कुछ ... लफ्ज़ होते तो मुक्कर गए होते ...

सिर्फ शब्दों से न करना किसी के वजूद की पहचान हर कोई उतना कह नहीं पाता जितना समझता और महसूस करता है...

पर्वतों की तरह खामोश हैं, आज के संबंध और रिश्ते..! जब तक हम न पुकारें... उधर से आवाज़ ही नहीं आती..!!

“मुस्कुरा कर दर्द को सहना क्या सीख लिया सबने सोच लिया हमे तकलीफ ही नही होती”

उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा . धूल चेहरे पर थी ,आइना साफ़ करता रहा !!

फिसलती ही चली गई एक पल रुकी भी नही अब जाके महसूस हुआ रेत के जैसी है ज़िन्दगी

मुद्दतें लगीं बुनने में ख्वाबों का स्वैटर.. जब तैयार हुआ तो मौसम बदल चुका था..

"सुकून वो था जब" होठों पे मुस्कान थी... कंधो पे बस्ता था सुकून के मामले में वो जमाना सस्ता था ....

“बचपन में पापा की लगायी बंदिशो को तोड़ने में बहुत मज़ा आता था, अब बड़े होकर ख़ुद पर लगायी बंदिशें तोड़ी नहीं जाती.”

“कितना जानता होगा वो शख़्स मेरे बारे में, मेरे मुस्कुराने पर जिसने पूछ लिया तुम उदास क्यूँ हो.”
 
 
 

Monday, March 19, 2018

विश्व गौरैया दिवस (#WorldSparrowDay) पर फोटो दिखाने की कोशिश

आजकल तो हर बात की फोटो खिंच जाती है ,.... क्या हुआ, कैसे हुआ - इसके लिए फोटो ढूंढी जाती है ,... पर ,...
पर बचपन में,...
कुछ फोटो आँखों ने खींची थी ,...
वो फोटो जो आँखों ने खींची थे उन्हें किसी को दिखा पाना मुश्किल - लेकिन ढूंढना बहुत आसान ,...
आज ,...
आज विश्व गौरैया दिवस (#WorldSparrowDay) पर ऐसी ही फोटो दिखाने की कोशिश ,....
महीना चैत्र - बैशाख का ,.... समय दोपहर के खाने का ,... थाली ,...
थाली में ,..
शानदार (चैतुई) अरहर की दाल ,... घी लगी रोटी ,... आलू के साथ कोई सूखी सब्जी और चावल ,...
बगल में,...
मिटटी की चकती पर रखी थोड़ी सी अगियार और एक छोटी थाली ,... उस रखी कई छोटी - छोटी रोटियाँ ,...
छोटी - छोटी रोटियाँ ,....
एक,... अगियार (हवन) के लिए ,...
एक,... गाय के लिए ,...
एक,... कुत्ते के लिए ,...
एक,... कौवे के लिए ,...
और भोजन की शुरुवात ,... भोजन मन्त्र के साथ ,...
हवन की समाप्ति ,.... "नैवेद्यं समर्पयामि" के साथ ,...
निवाला तोड़ने से पहले ??,... गाय की रोटी ,... गाय को पहुँची ,...
कौवे की कौवे को ,... और कुत्ते वाली - कुत्ते को ,...
पर ,...
पर क्या हमारी प्यारी चिरैया ,....
हमारी प्यारी चिरैया ,....वो गौरैया ,.. वो गौरैया क्या भूखी ही रहेगी ??
उसकी तो कोई रोटी नहीं ,....
ना जी ,... वो हमारी प्यारी चिरैया है - गौरैया है ,... वो भला कब फेंके हुए दाने खाती थी ?? वो तो ,..
वो तो ,.. थाली की बाट पर बैठ ,... थाली के चावल ही ले जाती थी ,... बेझिझक ,... निडर - अधिकार के साथ ,...
साझा हुआ करता है ,....
प्यारी चिरैया का ,... थाली में हमारी!!
बस ,.. यही फोटो ,... बस यही फोटो है जो आँखों में है ,.. जब याद आती है गौरैया की ,...
कोशिश की ,... की आप भी देख लो ,....
पर शायद ,...
पर शायद ,... आपके लिये इस फोटो पर विश्वास करना उतना मुश्किल ना हो ,... जितना आने वाले समय में बच्चो को बता पाना मुश्किल होगा की ,..
की ये कोई झूठी कहानी नहीं ,..... दैनिक दिनचर्या थी हमारी - तुम्हारी ,....
प्यारी गौरैया ,....पुराना घर टूटा ,... उसके साथ उजड़ी वो भी ,...
घर हमारा दुबारा बना ,...
वो धन्नी - वो छपरे अब नहीं ,... वो आँगन - वो चौके अब नहीं ,...
अब लेंटर है ,... फाइबर सीट है ,...
किचन और ड्राइंग रूम पर ,... डाइनिंग टेबल है ,....
घर हमारा - बना दुबारा ,... बसा दुबारा ,....लेकिन ,...
लेकिन वो हमारी प्यारी चिरैया ,.... हमारी प्यारी गौरैया ,...
उसका घर खो गया ,...
उसे थाली की बाट पर बैठ - खाना पसंद था ,.... शायद ,.. ये डाइनिंग टेबल अच्छा ना लगा ,...
उसे धन्नी के छेद में रहना पसंद था ,... रहने को कमरे हमारे पसंद नहीं ,...
उसे खुले आँगन में चहचहाना पसंद था ,... ड्राइंग रूम में बैठ - टीवी देखना नहीं ,...
शायद ,...
शायद ,... इसिलये ,... वो छोड़ गयी ,.. हमें ,.. हमेशा के लिए ,...
वो बोली थी जाते - जाते ,... पर सूना नहीं था हमने ,...
वो बोली थी ,...
वो बोली थी ,... ये लेंटर की छत नहीं ,... वो AC लगा ड्राइंग रूम नहीं ,...
मुझे ,..
मुझे तो ,... वो धन्नी की खोह,.... खुला आँगन और थाली की बाट ही चाहिये ,...
वो नहीं आयेगी ,...
वो नहीं आयेगी ,... मेरे पास रहने ,.... मेरे साथ इस विकास में ,...
वो साथी है मेरे सुकून की ,.... वो साथी नहीं विकास की ,...
इस धत्त तेरे ,.. विकास की !! #NagShukl

Wednesday, January 10, 2018

हे मूर्ख ,.. धर्म का विरोध ही - तेरा धर्म है !!

धर्म ,...
धर्म ,.. जो कुछ भी है ,.. व्यक्तिगत है ,... सामूहिक नहीं

मेरी समझ ये नहीं आता ,..
कोई भीड़ ,... कोई समूह ,..
धर्म के लिए लड़ कैसे सकता है??
क्योंकि ,....
क्योंकि धर्म ,....
धर्म,....नाम की जो चीज है,...
वो हो ,.. चाहे जो ,..
चाहे जो कुछ भी हो ,...होगी व्यक्तिगत,..
,... सामूहिक नहीं ,...

तो जो चीज ही व्यक्तिगत है - उसके लिए समूह कैसे लड़ सकता है ??
व्यक्तिगत ?,...
जैसे बिच्छू का धर्म ,... डंक मारना ,..
और ,..
साधू का धर्म ,.. बिच्छू को बचाना ,...

वैसे धर्म ,..
कोई सीधी लाइन भी नहीं ,.... और स्थूल भी नहीं की ,...
बाहरी कारक प्रभाव ना डाल सके ,..
परन्तु ,...
जिसका जो धर्म हो ,... होना ऐसा चाहिए की.... बाहरी कारक प्रभाव ना डाल सकें !!

एक उदाहरण ये है की ,...
"वो कहते हैं ,... वो नास्तिक है ,...
हम कहते हैं ,...
हे मूर्ख ,.. धर्म का विरोध ही - तेरा धर्म है !!"

बाँकी  - कभी बाद में ,...

Sunday, January 7, 2018

हमें याद आता है ,.. आंदोलन के समय सब साथी,.....

हमें याद आता है ,.. आंदोलन के समय सब साथी - जब एक दुसरे को फोन करते थे तब ,....
तब ,.. हेलो की जगह "वन्दे मातरम" बोला करते थे ,... फिर आम आदमी पार्टी बनी ,...
ये सिलसिला तब भी जारी रहा ,...
49 दिन में इस्तीफा हुआ ,.. मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान हुआ ,..
ऐलान होते ही ना जाने क्या हुआ की ,...
अचानक ,... "वन्दे मातरम्" वाले में 50% हिचकिचाने लगे,... फिर ,..
फिर 67 जीती ,.. और जीतने के बाद ,..
जीतने के बाद ,.. मोदी विरोध ,... मोदी विरोध इस कदर सिर्फ पर हावी हुआ की ,...
वो ,.. "वंदे मातरम्" विरोध तक में बदल गया ,..
यहाँ तक बढ़ा की,.. यदि आप ,..

आप ,.. "आप" के दफ्तर में जा - किसी पुराने जानने वाले से भी "वन्दे मातरम्" बोल दें तो ,..
तो ,... पार्टी दफ्तर में बैठे ,... 67 के दम्भी - नवोदित क्रांतिकारी ,...
पलट के "वन्देमातरम" बोलने की जगह ,... तुरत वहीं ,... आपको ,... संघी - चढ्ढीधारी घोषित कर देते थे ,...
और बाँकी बैठे कुछ क्रांतिकारी ,.. उनकी सहमति में ठहाके लगा देते थे ,...
दफ्तर के इस वैचरिक और चारित्रिक परिवर्तन और सोंच - समझ का ये बदलाव ,...
किसी के विरोध मात्र को ,... देशभक्ति बना / बता देना,...
किसी के विरोध मात्र को ,... स्वराज बना / बता देना
किसी के विरोध मात्र को ,... सारी समस्याओ का समाधान बना / बता देना
किसी के विरोध मात्र को ,... पार्टी के प्रति समर्पण बना / बता देना
किसी के विरोध मात्र को ,... राजनीति - स्वक्ष राजनीति बना / बता देना
ये सब ,..
ये सब ,.. इंगित कर रहा था ,... की ,..
की इनकी दिशा,.. क्या होने जा रही है और इस दिशा के चलते,.. दशा ,..
दशा वही जो होने वाली है ,..
ध्यान रहे ,... "आप" किसी मोदी से विरोध कीजिये ,... हमारा समर्थन है,... पर ,...
पर "वंदे मातरम" के साथ ,... इसके बिना ,...
इसके बिना ,... माफ़ कीजियेगा,.. कोई तरीका नहीं की ,...
की हम आपके पक्ष में खड़े दिखाई दें ,.. #NagShukl

Friday, January 5, 2018

ये सन्देश "आप" के उन तथाकथित अंधभक्तों के लिए जिन्हें पार्टी का हर फैसला मंजूर है

दोस्तों,

ये सन्देश "आप" के उन तथाकथित अंधभक्तों के लिए जिन्हें पार्टी का हर फैसला मंजूर है चाहे वो गलत भी क्यों ना हो.


आज आन्दोलन से निकली पार्टी के इतने बुरे दिन आ गए कि अब हमें कांग्रेस के लोगों को राज्यसभा भेजना पड़ रहा है "आप" की तरफ से ?

कहाँ थे ये गुप्ता जी बंधु जब इस मुल्क का आम आदमी सड़कों पर पुलिस की लाठियां खा रहा था और एक नए राजनैतिक विकल्प के लिए सड़कों पर गलियों की धूल फांक रहा था ?

जिन्हें हटाने, जिन्हें बदलने , जिन्हें सजा दिलवाने के लिए हम दिन रात एक थे आज उन्ही को सर माथे पर बैठा राज्यसभा भेजा जा रहा है.

और जो पार्टी समर्थक और कार्यकर्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं उन्हें ही कुछ चापलूस "गद्दार" कह रहे हैं और कहते हैं कि पार्टी छोड़ दो !!

इन अंधभक्तों की रीढ़ की हड्डियों का पानी खत्म हो गया पर हमारा नही।

प्रश्न पहले भी करते थे और आगे भी करेंगें। आखिर प्रश्न पूछना भी तो इस मुल्क में अन्ना और अरविंद ने ही तो सिखाया था।

अगर आंखें मूंद कर नेताओं के गलत फैसले मान लेना ही पार्टी से वफादारी है तो फ़िर कांग्रेसियों और भाजपाइयों से बड़ा वफादार इस मुल्क में कौन है ? क्या हम इनसे भी दो कदम आगे जाना चाहते हैं चाटुकारिता में ?

तुम लोगो की हैसियत क्या है जो प्रश्न उठाने वालों को कह रहे हो कि या तो चुप रहो तो पार्टी छोड़ो।

क्यों भाई, क्यों छोडें ? ये पार्टी किसी के बाप की थोड़े ही है ???????

" वजीर ना सही , हम सिर्फ प्यादे ही सही,
पर खेल में औकात सिर्फ तुम्हारी थोड़ी ही है

वो कहते हैं हमें कि चुप रहो या छोड़ दो इसे,
क्यों भाई, मुंह में जुबान किसी और की थोडी ही है,

हमारी थी, हमारी है और सदा हमारी ही रहेगी,
कहदो उनसे कि किसी के बाप की ये "आप" थोडी ही है."

डॉ राजेश गर्ग.

सोंचता हूँ - ऐसे कैसे ??

आये दिन ,...
खबर आती है की ,...
इस गाँव में ,...कभी उस गाँव में ,.....
कोई मर गया.
भूख से ,...
सोंचता हूँ - ऐसे कैसे ??
उस गाँव में,..
उस गाँव में,...कोई और,.. जिन्दा नहीं था??,.... या
उस गाँव में,...कोई और,.. समर्थ नहीं था ??
पता नहीं ऐसे कैसे,..हो रहा है / हो सकता है ??
क्योंकि ,... हमने,.. जो सभ्यता ,..
जो समरसता ,... देखी है ,..
अपने गाँवों में ,....
उसमे ,... कोई एक भूख,... से नहीं मर सकता था ,...
एक भूख से नहीं मर सकता था ,...
क्योंकि गाँव के बाँकी लोग ,.. उन एक - दो ख्याल रखते थे ,...
हमें याद ,...
कितने लोग ,... गेंहू - दाल - मठ्ठा - शकरकंद - आलू आदि ऐसे ही ,... एक दुसरे को दिया लिया करते थे ,...
लेकिन हकीकत है की लोग मर रहे है ,... तो
तो क्या ,..."देना लेना - बंद हो गया - गाँव में" ?? #NagShukl

Tuesday, January 2, 2018

आप के एक - सबसे शुरुवाती साथी ,..

दोस्तों,

बहुत महीनों से "आप" के बारे में कुछ लिखा नहीं, कोई स्व -विचार नहीं रखे. सिर्फ राजनैतिक और सामाजिक पोस्ट्स को शेयर करता रहा. अब राज्य सभा के लिए "आप" के संभावित उम्मीदवारों के लिए सोशल मीडिया पर जूतमपैजार चालू है. पढ़कर सिर्फ अफ़सोस करने के सिवा
किया भी क्या जा सकता था , सो वही किया.

पर आज देखा कि कोई गुप्ता जी है ,जो एक CA है और दुसरे भी गुप्ता जी है जो पहले कांग्रेस में थेऔर अब "आप" में - इन दोनों का नाम संभावित उम्मीदवारों में आ रहा है. पढ़कर दिल को ठेस लगी. क्या अब "आप" के इतने बुरे दिन आ गए हैं कि सिर्फ ऊँचे पदों पर बैठे लोगों या कांग्रेस से लाये लोगों को अपना नुमाइंदा बनाना पड़ रहा है.

क्या हमारा संघर्ष इसी दिन के लिये था ? क्या सड़कों पर इन्ही कांग्रेसी नेताओं को अपना "नेता" बनाने के लिए उतरे थे ? क्या "आप" को अपनी मेहनत की नेक कमाई का छोटा सा "दान" इसीलिए लाखों लोगों ने दिया कि सत्ता के गलियारों के नजदीक बैठे लोग चापलूसी से सत्ता की मलाई खाएं ?

नहीं, "आप" का सत्ता में आना एक आम आदमी का सत्ता में आना है. वो आम आदमी जो इस भ्रष्ट तंत्र से बुरी तरह हिल चूका था. जिसे इस मुल्क के लिए कोई आशा की किरण नज़र नहीं आती थी. तब अरविन्द, मनीष, संजय, गोपाल राय, योगेन्द्र और प्रशांत जैसे कुछ लोगों ने अन्ना की अगुवाई में जनता की आवाज़ उठाई.

हमारे जैसे लाखों आम लोग इस जूनून का हिस्सा बने, इसे और आगे तक बढाया- किसी ना किसी तरह योगदान देकर- तन से, मन, से, धन से, समय देकर, सड़कों पर प्रचार कर, लाठियां खाकर, नौकरियां खोकर, अपमान सहकर - दिन रात इस सपने को देखा, जिया और हकीक़त बनाने में योगदान दिया.

जब दिल्ली में सत्ता आई, तब कई तथाकथित बुद्धिजीवी अपने अपने ड्राइंग रूम से बहार निकलकर "आप" से जुड़ने लगे- ये वो लोग थे जो अपने अपने काम में सफल, अमीर और प्रसिद्ध थे- पर आन्दोलन के वक़्त बिलकुल चुप थे- अब दिल्ली में सत्ता मिलने पर इन्हें "आप" में रस आने लगा. अब ये अपने नाम और प्रसिद्धी को भुनाते हुए "आप" में शामिल होना शुरू हुए. ये प्रसिद्ध वकील, पत्रकार, उद्योगपति, बैंकर, लेखक आदि थे जो "बहती गंगा में हाथ धो " लेने चाहते थे और इन्होने हाथ धोये भी. अपनी प्रसिद्धी का फायदा उठा ये लोग सरकार के नेताओं के नजदीक आ गए.

पर इस पूरी कयावद में वो आम आदमी कहाँ गुम हो गया जो "कुछ भी नहीं था" ? जो अनजान सा था ? जो इस पूरे आन्दोलन का असली केंद्र था ? जो कुछ ना होते हुए भी पारंपरिक राजनैतिक दलों को चुनौती देने की धुरी था ? वही अनजान चेहरे जिन्होंने अरविन्द के नेतृत्व में सरकार चलाई और जिन्होंने देश को दिखा दिया कि बिना तजुर्बे के भी अच्छी नियत से बेहतरीन तरीके से सरकार चलाई जा सकती है.

तो इतने अनजान "आम" समर्थकों और कार्यकर्ताओं के रहते हुए अब "आप" में प्रसिद्ध चेहरे या राजदरबार के चाटुकारों की जरुरत क्यों आन पड़ी ?

"आप" को आम की बजाये "खास" चेहरे क्यों चाहिए ?

खेल का मज़ा तो तब आये जब आन्दोलन से ही निकले हुए अनजान लोगों में से किसी योग्य "आम आदमी" को राज्य सभा भेजा जाए जो ठोक कर अपनी बात वहां रख सके. जो आम आदमी की बात करे, उसके दुखों की, उसके कष्टों की, उसके रोजमर्रा के मुद्दों की, देशहित ही, जनमानस की बात कर सके- ठीक वैसे ही जैसे अरविन्द करते हैं.

तो क्यों हमें किसी बड़े पद पर आसीन व्यक्ति की जरुरत है राज्यसभा में भेजने के लिए ? क्या हमारे पास आन्दोलन की नीव रखने वाले और उस आग से निकले सोने जैसे " आम " लोग नहीं मिल सकते क्या ?

अरविन्द जी , जरा सोचिये अगर आप तक बात पहुंचे तो.

डॉ राजेश गर्ग

राजनीति को बदलना है तो पूरा - बदलो ,...

आज इसलिए बवाल करना पड़ा की ,...
पार्टी के बाहर से - किन्ही फर्जियो को क्यों चुना ,...
कल ,...
अब ऐसी छीछालेदर देखने के बाद ,... कोई सभ्य बाहरी तो जाने से रहा ,...
और अंदर से ,...
अंदर से ,... कुमार को नहीं भेजा तो ,...
तो ,.. फिर बवाल - कुमार को क्यों नहीं - उससे बेहतर हो तो बताओ ,..

गर कुमार को भेजा तो ,...
तो ,.. का क्या ??,.. जिसमे कहा गया , ..
पद लालची व्यक्ति पार्टी छोड़ें ,..
खैर ,...
कुछ भी हो ,.... जो होगा ,... सो होगा ,...
पर एक बात तो साफ़ है - जनाब ,...
ये राजनीति है ,.. और यही राजनीति है ,.. राजनीति ऐसी ही होती है ,..
तुमने क्या सोंचा था ,.. कोई हलुवा ,है,....
जो तुम खाते रहोगे - हम खिलाते रहेंगे,...
.
ध्यान रहे ,...
राजनीति को बदलना है तो पूरा - बदलो ,...
ये सुविधानुसार ,... जहाँ मर्जी - वहां बदल ली ,...
जहाँ मर्जी - नहीं ,...
ये ना चल पायेगा ,..
चलो ,... शुभरात्रि !! #NagShukl