Tuesday, August 20, 2013

आज राखी का पवित्र त्यौहार है..

प्रिय बहनों,

आज राखी का पवित्र त्यौहार है....मन में उमंग है, उल्लास है बहनों के दिलों में कि इस मौके पर वो अपने भाइयों से मिलेंगी, उनकी कलाई पर राखी बांधेंगी, उनके माथे पर तिलक लगाएंगी और उनके कुशल- मंगल की कमना करेंगी...

और इस मौके पर भाई कुछ उपहार/ धन देते हैं अपनी बहन को और साथ ही साथ वचन देते हैं उनकी रक्षा का...

कई सालों से अमूमन इसी तरह से मनाया जा रहा है ना इस पवित्र उत्सव को....क्यों ठीक कहा ना बहनों ?

चलिए इस इस बार कुछ थोडा और तरीके से इस उत्सव को मनाते हैं....

इस बार जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधें तो जरा ध्यान दें --

जब भाई आपको कुछ धन या उपहार दें तो उनसे कहें कि आप सिर्फ और सिर्फ ईमान से कमाया हुए पैसे ही स्वीकार करेंगी....भ्रष्टाचार की काली कमाई से लाया हुआ कोई भी धन या उपहार आप इस मौके पर नहीं लेंगी..

रिश्वत के कमाए हुए 5100 या 2100 रुपयों से बेहतर है कि बहनें ईमानदारी और उसूलों से कमाए हुए 51 या 21 रुपयों को अपने भाई से स्वीकार करें..

जब वो आपकी रक्षा की कसम खाए तो उससे कहिये कि इस कसम के अलावा वो ये भी कसम खाए कि जब भी उसकी आँखों के सामने हिन्दुस्तान की किसी भी बहन की अस्मत को तार-तार किया जा रहा हो तो वो उसकी भी रक्षा करेगा. और उन गुंडों से लडेगा..जब जब भी किसी बहन का सम्मान लूटेगा तो उसके इन्साफ के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करेगा और सड़कों पर उसके लिए न्याय मांगने उतरेगा...

इस मौके पर अपने भाई से ये भी प्रण लेना कि अपनी बहन की जान और इज्ज़त की रक्षा करने के साथ-साथ वो वादा करे कि कभी किसी की भी बहन को जलील नहीं करेगा, उसे तंग नहीं करेगा, उस पर एसिड नहीं फेंकेगा, उस पर राह चलते फब्तियां नहीं कसेगा, उसे चलती बस में धक्का नहीं देगा और अश्लील हरकत नहीं करेगा, बलात्कार जैसा घृणित कार्य नहीं करेगा....

उससे वचन लो कि वो कभी भी पैसे, शराब, पैसे, जाति, धर्म, पहचान या किसी और प्रलोभन में आकर ऐसे गुंडों, वहशी अपराधियों को समर्थन और वोट नहीं देगा जो कल चलकर सत्ता में आकर ऐसे हालात पैदा कर दें कि देश भर की माँ- बहनें असुरक्षित महसूस करें...

कहो उससे कि वो ये वादा सिर्फ तुमसे ही नहीं बल्कि इस मुल्क की सभी बहनों से करे..

महज कुछ रूपए या उपहार लेकर केवल अपने बारे में मत सोचो बहनों...इस उत्सव पर ये आपकी जिम्मेदारी है कि इस मुल्क की बाकि बहनों की सुरक्षा और सम्मान के बारे में भी गंभीरता से सोचें...

सोचिये जरा कि आखिर किसी भी लड़की को छेड़ने, तंग करने, बदनाम करने, एसिड फेंकने या बलात्कार करने वाला आदमी किसी ना किसी बहन का भाई तो होता ही है ना...????????????

ये मुल्क आप बहनों की तरफ बड़े विश्वास से देख रहा है....

तो कल राखी है....याद रखिये कि आपको आपके भाई से क्या उपहार और वचन लेना है.....भूलना मत......

भ्रष्टाचार और अपराध रहित हिन्दुस्तान बनाने में आप सभी का स्वागत है..

देश आपका, समाज आपका और कर्तव्य भी आपका..

डॉ राजेश गर्ग.

तू कर प्रयास ....जाग ... जगा ...और भगा ...भ्रष्टाचारियों को ...#AAP




 अपने घर में बैठ चाय के साथ समाचार सुनना,... फिर अगले दिन क्या सही क्या गलत पर सिर्फ बहस करना,...इससे सिर्फ समय पास हो सकता ...भ्रष्टाचार कम नहीं हो सकता ...सत्ता बदल सकती है ...पर व्यवस्था नहीं ...
जब हालत ऐसे हो की ...
सारे विकल्प एक जैसे हो ...तो वो मूर्ख और अकर्मण्य ही होगा जो किसी पूरी तरह से फेल चुके विकल्पों में ...सम्भावना तलाश करे ...
जब सारे विकल्प एक जैसे हो ...तो आपको कोई विकल्प चुनना नहीं है ...बल्कि ...
एक नया और सही विकल्प तैयार करना है ....
ये समय देश में ...विकल्प पर बहस करने का नहीं ...की कौन थोडा बेहतर है ...ये समय है ...
देश का, जनता का ...राजनीती का ...कायाकल्प करने का ....
उसके लिए सिर्फ चाय की दुकान पर बहस से काम नहीं चलेगा ...उसके लिए ....

गली गली घर घर में देशवासी को (दिल्ली वासी को) हर छोटा बड़ा ....अपनी क्षमता और समय के हिसाब से,....प्रयास करना पड़ेगा ...और आप जैसे सैकड़ो कर रहे हैं पूरी दिल्ली में ,हर विधान सभा क्षेत्र में !
उनका ये प्रयास छोटा लग सकता है,....पर वास्तव में ...कोई प्रयास कभी छोटा या बड़ा नहीं होता ...
छोटा प्रयास ही तो बड़ा बनता है ....
स्वराज के इस सपने के लिए ...अरविन्द ने तो दिल्ली की सड़को में ...अकेले ही प्रयास शुरू किया था ..वर्षो पहले ...आज आपके सहयोग और विस्वास से ..वो थोडा बड़ा और सार्थक रूप धारण कर चुका है ....
आज एक राजनीतिक क्रांति बन चूका ....आम आदमी पार्टी बन चूका .....
प्रयास अभी जरी है ...बस आपका जुड़ना बांकी है ....
प्रयास छोटा या बड़ा हो सकता है ... पर मकसद,....मकसद सबसे बड़ा है व्यवस्था परिवर्तन का !

आप हम से सवाल पूछते हैं हम कितनी सीटें जीतेंगे ?
हम आपसे पूछते हैं आप इस व्यवस्था परिवर्तन की बात को कितने लोगों तक लेकर जायेंगे खुद भी और हमारे साथ भी !
बस हमे इतना विश्वास दीजिये ये कहकर " हाँ,हम कर सकते हैं व्यवस्था परिवर्तन " !

विस्वास कीजिये खुद पर ...अगर आपने प्रयास किया ..तो व्यवस्था बदलेगी जरुर ... और हाँ ,ये सन्देश दोस्तों को भी भेज दीजिये दिल्ली में वो भी अपने इलाके में निकले ! आखिर जीत आम आदमी की ही होगी ! ....
तो बस तू कर प्रयास ....जाग ...
जगा ...और भगा ...भ्रष्टाचारियों को .....नागेन्द्र शुक्ल
#AAP #DelhiDeservesBest #Swaraaj #झाड़ू #Jhadu



 

Tuesday, August 13, 2013

10 लोग मिलकर देंगे ==>> 1 लाख रुपये ..तो #SaveRTI #Donation

पार्क में ...कुछ लोगों से बात कर रहा था ....उनमे से ज्यादातर कम से कम तीन बार वोट डाल चुके थे ...कुछ सीनियर सिटीजन भी थे ....
काफी सवाल जवाब के बाद,.. बात आयी ....राजनीतिक पार्टी को मिलने वाले पैसे की ...तो मैंने एक सवाल पूंछा की यहाँ जितने भी लोग उपस्थित है ....वो एक बात बताये ...
की क्या कभी ....उन्होंने ...या उनके किसी दोस्त ने ....या रिस्तेदार ने ...या रेस्तेदारो के रिश्तेदारों या दोस्तों ....में से किसी ने ...

किसी भी राजनीतिक पार्टी को दान दिया है कभी .....
किसी ने भी,... हाँ में जवाब नहीं दिया ....मतलब उनमे से किसी के भी,.... जानने वाले ने आज तक ने,...आज तक किसी भी राजनीति पार्टी को चन्दा नहीं दिया ....मैंने और मेरे किसी दोस्त ने भी नहीं दिया ...कभी (AAP के सिवाय),...

फिर मैंने अगला सवाल किया ...कितने बार - कितने बार आप लोगों ने ...बीजेपी या कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को ..जनता से चन्दा इकठ्ठा करते देखा ..क्या कभी कोई घर आया की ...उनकी पार्टी को चन्दा दे दो ....
तो पता चला ....चंदे लेने तो तरह तरह के लोग आये ..पर आज तक कोई बीजेपी या कांग्रेस के लिए सीधे चन्दा लेने नहीं आया ...

मतलब इन लोगों ने,... ना ही कभी चन्दा दिया ...और न ही किसी ने इनसे कभी चन्दा माँगा गया...

पर हकीकत ये है की ..बीजेपी के खाते में 800 करोड़ का चन्दा है ...और कांग्रेस के खाते में 2000 करोड़ का चन्दा ....

अब एक बात सोंचते है ...की मैंने जब अपनी पार्टी को चन्दा दिया तो ...दिया कितना?...
1000 रुपये वो धन है,....जिसे ज्यादातर आम आदमी ने दान किया है .....आप चाहे तो aamaadmiparty.org पर देख ले ज्यादातर लोग 1000 रुपये ही देते है .....

इनकम टैक्स का नियम है की 20 हज़ार से कम के चंदे का कोई हिसाब देने की जरुरत नहीं ...और बीजेपी कांग्रेस का कहना है की ..उन्होंने जो भी चन्दा पाया है ...वो उन दान दाताओं से लिया है जिन्होंने 20 हज़ार से कम दिया है ....तो उनके नाम बताने की जरुरत नहीं ....

वैसे तो साधारण रूप से देखा है की लोग 1000 का दान करते है ..पर मान लेते है की ...इनको लोगो ने दिल खोल कर दिया होगा तो ...इनका औसत चन्द प्रति व्यक्ति 5000 का होगा ...सही है ना ..इससे ज्यादा तो नहीं होगा ...

अब गणित का प्रयोग करते है ...
अगर मान ले,.. एक आदमी ने 10,000 रुपये चन्दा दिया ..तो
10 लोग मिलकर देंगे ==>> 1 लाख रुपये ..तो
100 लोग मिलकर देंगे ==>> 10 लाख रुपये ..तो
1000 लोग मिलकर देंगे ==>> 1 करोड़ रुपये ..तो
10,000 लोग मिलकर देंगे ==>> 10 करोड़ रुपये ..तो
1,00,000 लोग मिलकर देंगे ==>> 100 करोड़ रुपये ..तो
मतलब बीजेपी के ,...800 करोड़ के चंदे के लिए .....
8 लाख लोगो ने चन्दा दिया होगा ....
और कांग्रेस के,....2000 करोड़ ....के लिए चाहिए
2 करोड़ लोग .....

और अगर बीजेपी / कांग्रेस का औसत चन्दा (दान) 5000 रुपये मान ले तो ....
बीजेपी को चाहिए ...16 लाख दान दाता ....वहीँ कांग्रेस को चाहिए ...
4 करोड़ ...दान दाता ...

अब मेरी समझ से ....एक आम आदमी का औसत चन्दा ...1000 रुपये ही होता है ...तो ....
बीजेपी के ,...800 करोड़ के चंदे के लिए .....
40 लाख लोगो ने चन्दा दिया होगा ....
और कांग्रेस के,....2000 करोड़ ....के लिए चाहिए
10 करोड़ लोग .....

अब सवाल ये ....की यहाँ उपस्थित लोगो की ....जानकारी में ...ऐसा कोई नहीं जिसने बीजेपी ...या कांग्रेस को कभी चन्दा दिया हो ....या उनसे कभी माँगा गया हो ......तो सवाल ये उठता है ...की ....

सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के चंदे के लिए ....1 करोड़ 40 लाख लोग चाहिए ....और बांकी पार्टी ..उनका क्या ..
मतलब अगर सारी पार्टी के चंदे की बात की जाए तो ...देश में कम से कम 5 करोड़ ...लोगो ने राजनीतिक पार्टी को चन्द दिया होगा ....

पर वो 5 करोड़ है कौन ....जिनमे से किसी एक को भी .....ना मैं जानता हूँ ...और ना आप ...

जबकि ..मेरे किस किस ...दोस्त ने ...आम आदमी पार्टी को ...कब कितना चन्दा दिया ..मुझे पता है ....एक साधारण सी आदत है की हम जब भी चन्दा देते है ...तो उसे अपने दोस्तों को जरुर बताते है ...

अब जैसे ...आज मैंने 1000 का चन्दा जमा किया ....तो आपको बताया ना ....पर ये बीजेपी कांग्रेस ...को गुप्त दान देने वाले बड़े महान है ....जो दान भी देते है ...और किसी को बताते भी नहीं ....

अब या तो उन डेढ़ करोड़ लोगो में से ....आप किसी ना किसी को जानते होंगे ...जिन्होंने बीजेपी / कांग्रेस को चन्द दिया ....
या फिर ..वही सच है ....जो आपको पता है ...की ये बीजेपी कांग्रेस ...अम्बानी और अदानी की दुकाने है ....और इन पार्टी की सरकारे ..अपनी दूकान मालिको के लिए ही काम करती है ....हमारे या तुम्हारे लिए नहीं ....

अब आप ही सोंचो ......खैर पार्क में तो सबको समझ आया ...आपको ?....
वैसे अंत में ..एक और बात अरे बीजेपी कांग्रेस में से किसी ने चन्दा नहीं माँगा आपसे कोई नहीं .....पर आम आदमी पार्टी .....मांगती है .....आपसे चन्दा ....और देती है पूरा हिसाब ...आपके चंदे का ......नागेन्द्र शुक्ल

तो दीजिये दान ...जितना दे सकते है .....please ...
दान देने के लिए ....
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दान दाताओं की सूची के लिए
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तो दोस्त अब दान देने की तो बनती है ...है की नहीं ....नागेन्द्र शुक्ल
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Tuesday, August 6, 2013

विदेश नीति का कोई ज्ञान नहीं मुझे ...पर अपनी छोटी समझ से ...जो है वो ये की ....

विदेश नीति का कोई ज्ञान नहीं मुझे ...पर अपनी छोटी समझ से ...जो है वो ये की .....
सिर्फ हमारी आतंरिक फूट और अव्यवस्था ही है ..जिसकी वजह से हिम्मत पड़ती है ..पाकिस्तान और चीन की ...ऐसे दुष्कृत्य करने की ......
पर ये आतंरिक फूट और अव्यवस्था,...हमारे शासको के लिए ...जरुरी है ...इसलिए ये है,... अभी तक हमारे देश में ...

शायद यही एक कारण है ...नहीं तो हम दुनिया की सबसे बड़ी consumer market है .....
दुनिया में कोई बनाये कुछ भी ....पर खपत सिर्फ हम कर सकते है ...नहीं तो सब waste scrap  है ....
हमारा सिर्फ consumer होना ...दूरदृष्टि से घातक है .....पर .....
आज की स्थिति में ..यही हमारी ताकत है ....

अगर हम रोक दें ...इस तरह की ....अवैध बिक्री ...चीन के सामान की ...हमारे देश में ...
तो ये लाल ड्रैगन ....सम्हाल भी नहीं पायेगा ... अपना कूड़ा कबाड़ा ....
घुटने पर बैठ कर ....बात करेगा ....

पर भ्रष्ट व्यवस्था के चलते ....बिक रहा है ...चीनी माल ....धड़ल्ले से ...बिना MRP के ...बिना किसी quality चेक के ....
मुझे पता है ...की देश में ....सिर्फ 1% ही आयत शुल्क मिल रहा है सरकार को ..चीनी आयात से ...
ऊपर से इसकी इतनी हिम्मत ...की धमकी देता है ....

अरे हम रोक सकते है ...उनकी पूरी अर्थव्यवस्था ...ला सकते है घुटने पर ...और वो आयंगे ...आना पड़ेगा ...
बस ...कोई है .....
कोई है ..जिसे अपने स्वार्थ से ऊपर उठना पड़ेगा .....या छीननी होगी ताकत,...जनता को ...
ऐसे नाकारा, स्वार्थी और डरपोक लोगो से ...

रही बात पाकिस्तान की ....तो पाकिस्तान को सिर्फ चन्द घंटे में ...औकात पर लाया जा सकता है ....
पर वो तब तक नहीं हो सकता ...जब तक हम चीन की आँख में आँख ना डाले ....
ये चीन की शह और मिलीभगत है ...की आये दिन ...आता है पाकिस्तान ....हमारी सीमा में ...

कोई कारण नहीं है ...की ऐसा हो ...अगर हम एक स्वस्थ व्यवस्था ला पाए .....नागेन्द्र शुक्ल

एक Selected Executives (IAS) दूसरे Elected Executives (नेता मंत्री) ....

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश की हालत एक है ...सभी जगह भ्रष्ट लोग (अफसर और नेता) ...ईमानदार पर हावी है ...
इन भ्रष्ट लोगो की बात चीत और काम करने के तरीके से ...तनिक भी अहसास नहीं होता की ....हमारे देश में लोकतंत्र है ...कानून का राज है ....
हमारे देश में दो तरह के Executive है
एक Selected Executives (IAS) दूसरे Elected Executives (नेता मंत्री) ....
Selected Executives (IAS) की बाग़ डोर ...Elected Executives (नेता मंत्री) के हाँथ होती है ....और Elected Executives की बाग़ डोर ....जनता के हाँथ होती है ....
तो इस हिसाब से .....जनता ही है जो सर्वोपरि है ....और इसीलिए इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है ....

हमारे देश में Selected Executives के लिए Selection process कड़ा है ....पर Elected Executives ने ..election process को इतना कमजोर कर दिया है ...और इस election process को कमजोर करने के लिए किया क्या है ?....इन्होने देश को ...देश की जनता को ...जाति धर्म और भाषा के नाम पर बाँट दिया है ..ताकि लोकतंत्र की जो सर्वोपरि ताकत है ....जनता ...वो आपस में लडती रहे ...और ये Elected Executive मिल झूल कर देश पर राज करते रहे ....देश की संम्पति को लूटते रहे ...और ...Selected Executive का अपने फायदे के लिए दोहन /शोषण करते रहे ...

ये Selected Executive परमानेंट है ....जबकि Elected Executive temporary ....पर फिर भी हकीकत ये है ....की हमारे देश में जितने पद Selected Executive के नहीं है ...उससे कहीं ज्यादा पद Elected Executive के है ...

Elected Executive है तो temporary पर ...होते ये परमानेंट से ही है क्यों ?...दो कारण है
1. ये Elected Executive के पद ज्यादा है ..और एक व्यक्ति कई कई पदों पर आसीन है ...एक दो छूट भी जाए तो क्या ...कुछ नहीं
2. हमारे देश के संविधान में कोई प्राविधान ही नहीं जिसके द्वारा इन Elected Executive को उनका कार्यकाल ख़त्म होने से पहले हटाया जा सके ...
यही कारण है की ...ये निरंकुश हो जाते है ....और यधि कोई Selected Executive इनके स्वार्थ पूर्ती के अलावा अगर ....जनहित के लिए काम करता है तो ...ये उसे निलंबित या ट्रान्सफर कर देते है ....

और जनता या Selected Executive के पास ऐसा कोई अधिकार ही नहीं जिससे इन Elected Executive पर कोई दबाव बनाया जा सके .....इसीलिए ...इसीलिए ...हमारे देश की व्यवस्था सड चुकी है ....और कुछ लोगो के हाँथ का खिलौना बन चुकी है ....

और यही वो कारण है ....जिसकी वजह से ...देश की जनता के पास ...Right to Reject और Right to Recall होना ही चाहिए,....
क्या कहते हो आप ????......
जब तक ऐसा कोई अमूल चूर परिवर्तन नहीं होगा देश की व्यवस्था में इनकी तानाशाही को नहीं रोक जा सकता .....इसीलिए अन्ना और अरविन्द जी के नेतृत्व में देश की जनता ...आन्दोलन रत है ...की व्यवस्था में परिवर्तन हो ...
पर आज की व्यवस्था में ....कोई परिवर्तन सिर्फ और सिर्फ Elected Executive ही कर या करवा सकते है .....

और इनको ये पता है की .....ये सारे चोर चोर मौसेरे भाई ...मिलकर कभी कोई ऐसा कानून बन्ने ही नहीं देंगे ...जिससे इनके ऊपर किसी तरह का दबाव बनाया जा सके ...और कानून सिर्फ यही बनायेंगे ....

इसका मतलब साफ़ है ...और ये बता भी चुके है ...की अगर कोई परिवर्तन चाहिए तो संसद में आना पड़ेगा ...व्यवस्था को चैलेंज व्यवस्था में रह कर करना होगा ....जनता की ये नहीं सुनेगे ....और इसी वजह से ...अरविन्द ने अपनी क्रांति को ...व्यावहारिक रूप से मोडते हुए ....संसद तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया ....और आपकी पार्टी ...आम आदमी पार्टी का प्रादुर्भाव किया

अब ये जनता के हाँथ है ...की ऐसे लोगो को संसद विधान सभा भेजे जो ....ऐसे परिवर्तन ला सके जिससे Elected और Selected  Executive दोनों पर सीधे जनता का दबाव हो .....और इसी व्यवस्था को नाम दिया जा सकता है ...."स्वराज".....
यही होगा सच्चा लोकतंत्र .....
और इसके लिए देश की जनता को जुड़ना होगा .....जाति धर्म भाषा से ऊपर उठाना होगा ....
रास्ते दो ही है ...
या तो निजी स्वार्थ से ऊपर उठ ...व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ो ...
या फिर ...आज़ाद देश में .....भ्रष्ट नेता / अफसर का गुलाम बन कर रहो ....

चुनना आपको है ....क्योंकि ..करना भी आप को ही है ...किसी और को नहीं .....

पर चुनने से पहले ये देख लो ...और सोंच लो ....
की जो अशोक खेमका के साथ हुआ .....जो दुर्गा शक्ति के साथ हुआ ....वही अंत नहीं है इस कड़ी का ....
इन घटनाओ के बाद भी जारी है ....
जैसलमेर में क्या हुआ 2 दिन पहले ..इमानदार अफसर को ...एक हिस्ट्री शीटर के लिए हटा दिया ...
कल दिल्ली में क्या हुआ ...एक अफसर को इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उसने खाने में .....कबाब नहीं ....सैंडविच मंगवाई ....और इस महिला अधिकारी का ...6 साल में 11 तबादला है ....
अगर ऐसे ही चलता रहा तो ....कोई ताज्जुब मत करना ...की ये अशोक खेमका के 21 साल में 44 transfer को बौना बना दे ...वैसे ये है भी कोई बड़ा नहीं ....
एक RTI से पता चला है की ....सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश में 43 ऐसे अधिकारी है जिनके 40 से ज्यादा तबादले हुए ....

ऐसे तबादले और निलंबन ही असहनीय है ...
पर सीमा पार तब होगी जब पता चलेगा की कितने .....सतेन्द्र दुबे ....शहीद हुए ?.....

क्यों लजाते हो देश को ....जनता को ...क्यों नहीं जुड़ जाते ....क्यों लड़ते नहीं ....बदलने के लिए ..
इस व्यवस्था और अजीब तरह की लोकतान्त्रिक तानाशाही को ........?.....क्यों ?...
.
पर बदल सिर्फ तब पाओगे ...जब सही और गलत सोंचोगे ...मंदिर मस्जिद या जाति भाषा नहीं ......और ये नेता आपको बरगलाते रहेंगे ....क्योंकि इसी में इनकी जीत है ....
इनको पता है ..की आपकी,.. हमारी ...जनता की तैयारी पूरी हो चुकी है .....
बस जनता का जुड़ना बांकी है ......
इधर जनता समझी नहीं ...की उधर "स्वराज - सच्चा लोकतंत्र" आया ....राईट तो रिजेक्ट /रिकॉल आया ...जनलोकपाल आया ...

भ्रष्ट नेताओं ने तो सारी ताकत लगा रख्खी है ....की ऐसा ना हो ....पर जनता अभी जागी नहीं ....जब जाग जायेगी ..तो क्या ...चाहे selected हो ...या elected हो ....सब की चाभी ...जनता के पास ....यही तो होगा लोकतंत्र ..है की नहीं ....नागेन्द्र शुक्ल

Saturday, August 3, 2013

बादशाह का हुक्म है

बादशाह का हुक्म है
सावधान हो जाओ सब

अपने आप को बचाओ
उस पागलपन के कीड़े से
जो फैल रहा है देश मे
दूसरी आज़ादी के नाम पर ।
एक बूढ़ा सठिया गया है
कहता है आग लगा दूँगा
तख़्त को जला दूँगा
ताज को मिटा दूँगा
उसके झाँसे मे मत आओ
तुम्हें बरगला रहा है वो
बहकावे मे मत आओ
तुम्हें तो रोटी चाहिये न
वो बादशाह देंगे
एकदम मुफ्त मे
कभी रोटी मे ज़हर मिल जाये
तो शांति से मर जाना
हल्ला मत करना
बादशाह ख़ुद आयेंगे तुम्हारी
लाश को पैरों से ढ़केलकर दफ़नाने के लिये ।
-----
वो बूढ़ा पागल हो चुका है
बोलता है देश को बचा लो
अरे, बादशाह देश के मालिक है
क्या गुनाह किया अगर
ख़जाने को हथिया लिया
तुम्हारे बादशाह बड़े नेक दिल है
दो चार सिक्के तुम को भी फेंक देंगे
अदब से सर को झुकाना
जब उनकी सवारी गुज़रेगी
तुम्हारे शहर से
हाँ बिटिया को भी ज़रूर लाना
बादशाह को लड़कियाँ बहुत पसंद है
परेशान मत होना
बादशाह रहमदिल है
बिटिया को ज़्यादा नही तड़पायेंगे
-----
वो बूढ़ा पगला गया है
बोलता है बादशाह नौकर है
और रिया़या मालिक
तुम उसकी बातों पर ध्यान मत दो
तुमको तो अच्छी तरह पढ़ाया गया है न
मुल्क की क़िस्मत तय करने का हक
बादशाह को ही है
रिया़या तो सिर्फ ताली बजाने के लिये है ।
उस बूढ़े ने बादशाह की ताक़त
को नही देखा है
हुकूमत के सिपाही
बादशाह के बहुत ही वफ़ादार है
रियासत की सलामती के लिये
तुम्हारी बेजान हड्डियों को चटनी की
तरह मसल देना बहुत छोटा सा काम है ।
लेकिन बादशाह तुम से बहुत प्यार करते है
तुम भी हुकूमत से वफ़ादारी दिखाओ
तुम उस बूढ़े का साथ मत दो
फिर देख लेना
हमारे रहमदिल बादशाह
किस तरह उस पागल को
ज़िंदा दफ़ना देंगे
तुम उस जश्न को ज़रूर देखना
और जम कर ताली बजाना ।
बादशाह बहुत ख़ुश होंगे
और बख्शीश भी देंगे ।
-------
-----------डाॅ शैलेन्द्र मिश्रा की क़लम से

कभी किसी ने बताया ही नहीं .....पर किसी ने बताया क्यों नहीं?



नयी बात नहीं है ...पता सभी को है ..पर आज फिर अहसास हुआ की .....हमारे देश की एक बहुत जनसँख्या ...वाकई ये समझती है की किसी ना किसी (नेता, या चमचा ...या चमचे का चमच्च )...की दया पर जिन्दा है ....और ये बहुत बड़ा तबगा,.. ये जानता ही नहीं की ...उसे भी हक़ है ...सवाल करने का ....सबके बीच,... अपनी बात रखने का ...
उसे तो बस ये पता है ...मैं ...मेरा मोहल्ला या गाँव .....उसके अहसान के तले ...सांसे ले रहा है ....
और हो भी क्यों ना?......माहौल ही कुछ ऐसा है ....
सीधे साधे,...अपनी जिंदगी की जहादोजहद में व्यस्त ....कर्मठ...लोगो ...बताया ही जाता है ...की इस सड़क का निर्माण ..फलाने भैया ने करवाया है ....
किसी ने कभी बताया ही नहीं ....उनको ..की,...

ये उनका ही पैसा था ...और उन्होंने ही नौकरी पर रख्खा है ....पार्षद / विधायक को ....अपने सामाजिक कार्य करने के लिए ....उनका काम ही है ये सब करवाना .....कोई अहसान नहीं करते वो तुम पर .....

वास्तव में वो ..जन-सेवक है ....मतलब जनता के काम करने/करवाने ... का अधिकारी ....और तुम इसकी तनख्वाह देते हो उनको ....तो फिर अगर वो कुछ करते ....करवाते है ...
तो कोई अहसान नहीं ......

दूध के तबेले में ...काम करने वाले ..राधे ...इसी वजह से पिछले 3 बार से एक जनाब को वोट दे रहा है ..क्योंकि ...उनके घर के पास हैण्डपम्प लगवाया था ....किसी ने ....

अब वोट तो देना ...हक़ अदा करना है ना ......

आह .....ये हालत है ....आज़ादी के 65 साल बाद .....की हमें पता ही नहीं की ....हम आज़ाद है ....
कभी समझ ही नहीं आया ...आज़ाद मतलब क्या ....
आज़ाद का हक़ क्या?....और कर्तव्य क्या?
कभी किसी ने बताया ही नहीं .....पर किसी ने बताया क्यों नहीं?
पर ये,.... हुआ नहीं है .......किया गया है .....
और किया किसने है ?......शायद उन्हीं ने ...

जो आज ऐसी राजनीतिक पार्टी के ....कार्यकर्ता या संमर्थक है  ...जो RTI के अन्दर नहीं आना चाहती ....जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव नहीं होने देती ....ये वाही लोग है ...जो देश के टीचर वकील डॉक्टर पुलिस ........दुनियादारी .....सबको कण्ट्रोल करते है .....
और ....
आम आदमी पार्टी के खिलाफ है ..पारदर्शिता के खिलाफ है ....
और ..कुछ गलत ...कुछ गलत ढूँढने में व्यस्त रहते है ...AAP और अरविन्द में .....नागेन्द्र शुक्ल