Thursday, July 18, 2013

भ्रष्टाचार, रुपये के दाम, महँगाई और काले धन की .. चारो में समानुपातिक सम्बन्ध है


ये तो पता नहीं,.. की कथित शब्द सेक्युलर,..की परिभाषा क्या है ...
पर किसी एक व्यक्ति का विरोध,... secularism बिलकुल भी नहीं हो सकता ...
मेरी समझ से किसी भी (हर एक) इंसान को ....इन्सानी माप दंड पर आँकना ही ....शायद secularism होगा ...
वैसे जिस देश की जनता ..भूखी हो, प्यासी हो ...न्याय और सम्मान को तरसती हो ....
वहाँ सेक्युलर और कमुनल की बात करने वाले है क्या ?...ये तो आप जानो ...
पर मुझे ये पक्का पता है ...की वो जनता के,...देश के हितैषी नहीं हो सकते .....

इस बार नेता चाहे जो बात करे पर ...जनता ....
जनता सिर्फ यही बात करेगी की ....भ्रष्टाचार, रुपये के दाम, महँगाई और काले धन की ..
चारो में समानुपातिक सम्बन्ध है ....ये सब एक साथ आंकिक तौर पर एक साथ बढ़ते है ....और कारण ..
कारण इन चारो का एक ही होता है ....और वो है ....भ्रष्ट व्यवस्था और सत्ता - ताकत की राजनीती .....
ये भ्रष्ट व्यवस्था और ...स्वार्थ - सत्ता की राजनीती को बदलना पड़ेगा .....
पर बदलेगी कैसे ?....बदलेगा कौन ?.....अरे जनाब सिर्फ आप,..बदलना तो आपको ही पड़ेगा ...और सच ये है की बदल भी सिर्फ आप ही सकते है .........नागेन्द्र शुक्ल
 

Stop Being Numb, We can't afford to hate politics


There is a wave of change in the entire Delhi today. Whatever be the religion, caste, creed or age of a person, whether he is rich or poor, a city dweller or a villager, everyone seems to be dreaming about change.

If this enthusiasm keeps up, something that has not happened in the sixty four years in Delh's history will happen in ten.

But at this point of time it is very important for us to understand our future course of action. Your single vote can play havoc in the heart of monster corruption. Everyone wants to see the change, but none would like to be the part of it.

This precious opportunity should not get lost in an insignificant target such as mere change of government. This time our slogans should shout "CHANGE THE SYSTEM". The democracy that exists in India today will have to change. Most of us abuse and criticize our corrupt ministers and government but still never vote. Now there is no time to complain, grumble or criticize anybody...Come and Be the part of the CHANGE.
‪#‎JoinAAP‬ and ‪#‎Vote4AAP‬ ‪#‎Swaraj‬

‪#‎DelhiDerservesBest‬
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defects in our political system

One of the defects in our political system is that the mass is ruled by few who do not necessary represent them.

Poor

The Majority of the class which votes belongs to the economically weaker section of the society, which agrees to vote against cash, food, laptop (a temporary relief to various hardships)

Middle Class

There is a majority of middle income group educated class, which though is affected the most by the system (devoid of effecient Public Transport, Water Facilities, Reasonable prices on Electricity and Gas, and Food Items) continues to prefer "Slogging more than before to make the ends meet" rather than Vote on the voting day . It just does not occur to this class that the weapon that the have in hand (their VOTE) can effective bring about changes in their lives.

Rich Class

The majority of this class is sceptic, insecured and scared of letting go of comforts. It lacks empathy and has fallen prey to the competition of power. Empathy(which is also a part of emotional intelligence) seems to be more or less lacking among this section of the society. Although the pursuit of this section in very self centred, this section is conveniently blinded by the politicians in the name of goodies an freebies (promises of skyscrapers, Malls, Clubs, Gymkhanas etc). This class is fooled and deprived of the facilities by the Government in the name of private membership etc.

The only class that gets benefitted is the Politicians who without loosing any thing from their pocket manage to fill in their pocket

For instance:-

1. The Politicians in the name of the Government (by passing laws like Land Acquisition ACT) acquire land from poor in the name of Public Purpose for eg Garden/School/Playground/Railway Track etc. The consideration paid to the land owner is mere pea-nuts.

2. The land so acquired for Public use remains unused till the time that the original owner and also others forget about the mode and purpose of land acquistion.

3. The Politicians then in the name of some or the other Company (necessary reflecting interest of the Politicians or his AID) acquires this land from the Government either in the veil of lease/caretaking policy/ Development Rights etc.

4. The Company so backed by the Politician then constructs skyscrapers, Malls, Clubs, Gymkhanas etc at exhorbitant rates and collects the money from the rich class.

5. Thus the Politicians(Government) Remain like the MONKEY who grabs opportunity from both rich and the poor at the cost and expense of the Middle Class who mainly pays for the expenses of these Politicians.

Our Government has become a Government "OF THE FEW, BY THE FEW AND FOR THE FEW".

Some of the early rising birds have realised the entire game and now seek to change the rules of the same. We have the option either to join them and give them the strength to enable them to make us stronger by changing the system and Seeking Vyavastha Parivartan mainly by incorporating

1. Jan Lokpal
2. Right to Reject
3. Right to Recall
4. Decentralisation

You can contribute to this movement seeking change by any of the following ways:


1. Join ‪#‎AAMADMIPARTY‬
2. Volunteer with your expertise
3. Promote the vision of AAP i.e. ‪#‎SWARAJ‬
4. Donate at http://donate.aamaadmiparty.org/
5. Share our posts and ask your friends to share too
6. Invite your friends to follow our page.
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Monday, July 15, 2013

पानी शायद इतना बड़ा मुद्दा नहीं ....जितना की बताया जा रहा है .

अगर आपको लगता है की पानी शायद इतना बड़ा मुद्दा नहीं ....जितना की बताया जा रहा है ...तो आप गलत है ....
क्योंकि वास्तव में मुझे पानी की किल्लत के बारे में ...सिर्फ TV और समाचार के माध्यम से ही ज्यादा पता चला ...पर अभी रविवार के दिन मुझे किसी काम से दिल्ली के चांदनी चौक के पास एक मोहल्ले में किसी से मिलने जाना था ....किसी तरह पूँछते - जाँचते उस गली तक पहुँचा,....जहाँ उनका घर था ..

पर ये क्या घर की कुण्डी खटखटाने से पहले ही पीछे से काफी जोर - जोर की आवाज़े आयी .....और बिना कुण्डी खटखटाये ही दरवाजा खुला ...
पर इन जनाब को जैसे ....दीन - दुनिया से कोई मतलब ही नहीं ....कौन और क्यों खड़ा है दरवाजे देखने का भी टाइम नहीं .....
बस बाल्टी - डब्बे लिए बेतहाशा भागे ....
जिस गली में कुछ देर पहले तक बच्चे आराम से इधर - उधर सीढ़ियों में बैठे थे .....उकता रहे थे ..सबके अन्दर बिजली सी फुर्ती ....और सबके हाँथ में डिब्बे - बाल्टी ....और एक निश्चित दिशा में दौड़ .....

इन सब के पीछे - पीछे जाने के सिवाय ..मेरे पास भी कोई रास्ता नहीं था ...चल दिया ....बाहर थोड़ी बड़ी गली में ...एक हाँथ वाले ठेले के ऊपर 500 लीटर की टंकी रख्खी है ......और बच्चे जवान सब बस लाइन में ....हर कोई बस चिल्ला रहा है ...एक दूसरे से लड़ रहा है ....किसी को किसी और चीज़ का ध्यान ही नहीं ....

सबसे बड़े नेमत ....पानी ....वो भी 500 लीटर ....पूरे मोहल्ले के लिए ...आया जो था ...
करीब आधे घंटे की गहमागहमी ...पानी के ख़त्म होने के साथ ...शांत हो गयी .....

घरो के दरवाजे बंद .....बच्चे इधर उधर रास्तो पर तैनात .....बाल्टी डब्बे के साथ ....की अभी अगर कोई और टंकी आये ...तो शायद मेरा नंबर लग जाए ....

एक बात बताये ....वो गली,... वो मोहल्ला ....उसकी सड़के ..खुली नालियाँ ...इस कदर गन्दी थी ....की शायद आज से पहले कभी इतने लम्बे समय तक ...इंतनी गंध ...मेरी  नाक ने महसूस नहीं की थी .....खड़ा होना दूभर ...पर जरुरी है ...इन्हें देखना ...सहना ...और समझना ...तभी तो समझ आएगा ....की जनता को दिक्कत क्या है ...और समाधान कैसे होगा ...

मुझे पक्का - पक्का पता है ....की संसद और विधान सभा में बैठे हमारे कर्ता - धर्ता ..अगर उस जमीन पर ....एक दिन गुजार दें तो ....उन्हें कई हफ्ते शायद अस्पताल में गुजारने पड़े ....

ये आम आदमी है ...जो झेल सकता है ये ....ये आम आदमी ही है ...जो झेलता है ये .....और अब ये आम आदमी ही है ...जो बदल सकता है ये .....

खैर कुछ देर खड़ा सोंच ही रहा था ...की अचानक सर कूड़े कबाड़े से भरा एक ...पौलिथिन गिरा .....पर ऊपर देखना और ये समझ पाना नामुमकिन की किस ...छज्जे या खिड़की से आया होगा ....

ये देख कुछ बच्चे करीब आये ....बोले ...अरे बीच में नहीं ...साइड में खड़े हो ...तो हो गया खड़ा ...और उन बच्चो से पूंछा ....की भाई इतनी गन्दगी है ....कोई सफाई करने या करवाने की कोशिश क्यों नहीं होती ....बच्चो ने बताया ....पूरा दिन बाल्टी डिब्ब्बो के साथ पानी की बाँट जोहता गुजरता है ....कुछ और नहीं .....
गन्दगी .....दुनिया दारी छोड़ो ..पहले पानी चाहिए ....

मैंने पूंछा ....ये जो पानी आया था किसने भेजा था ...तो पता चला की ...जो भी पानी की टंकी आती है ...उस पर भेजने वाले का नाम और पार्टी का चिन्ह होता है ....देख लेना ....
और अभी जिसने भेजा था ...वो वही है .....जो इस इलाके का पिछले दो बार से पार्षद है .....
मैंने पूंछा, यहाँ पानी की लाइन नहीं है क्या ?.....उनका जवाब था ....पड़ी है ...पर सब टूटी है ....कभी पानी नहीं आता ....

पिछले दस सालो में ....जिस विधायक ....पार्षद ने ...अपने अपने पानी की टंकी मोहल्ले में भेजी ....उन्होंने इन पाइप लाइन को सही क्यों नहीं करवाया ?.....पानी को अपनी मोहर लगी पानी की टंकी में क्यों भिजवाया ?.....

सच्चाई ये है ...की अगर पाइप में पानी पानी आने लगा तो .....लोग शिक्षा सड़क और स्वस्थ और बिजली की बात करेंगे .....
और अभी ...अभी तो नेता जी को ...सिर्फ और सिर्फ 500 लीटर की पानी की टंकी ...दिन में दो बार भेज कर ...वोट मिल जाता है ...और ...इस पानी के बदले ...वो बन जाते है ..रहनुमा ....

इस मोहल्ले से वोट लेने का रास्ता...सिर्फ पानी की टंकी है ....इनकी जरुरत सिर्फ पानी की टंकी है ....बस इसी में उलझे है सालो से ....और चल रहा है देश ....

ये कोई unautorized कॉलोनी नहीं थी ....ये कहीं दूर रेगिस्तान भी नहीं था ..ये कोई सूखा ग्रस्त इलाका भी नहीं था ....
देश के दिल .....दिल्ली ....और दिल्ली का दिल ....चाँदनी चौक का एक मोहल्ला था .....

ऐसा नहीं है की दिल्ली में ....पानी की कमी है ....बिलकुल नहीं है ....दिल्ली के पास पर्याप्त प्रति व्यक्ति पानी है .....
पर पानी की लाइन ....उसको कोई क्यों सुधावाये ?.....जब वोट पानी की टंकी से मिल जाते है .....और जनता से टैक्स ....
टैक्स तो हर चीज़ पर वसूल लेती है सरकार ...VAT जो है .....
आज आप अपनी जेब का 1 रुपया भी ऐसे नहीं खर्च कर सकते ....जिसमे आप सरकार को टैक्स ना देते हो ....हाँ वो व्यापारी बैमानी करे तो करे ...पर आप तो टैक्स देते ही है .....हर चीज पर ....एक माचिस की डिब्बी पर भी ...और वोट ....वो तो पानी की टंकी है ना ...उसके लिए ....

अब गर्मी बहुत थी ...मुझे प्यास लगी ....तो सोंचा इन घरो से ...कुछ और तो माँगा जा सकता है ....पर पानी नहीं ....क्या पता जिस घर से एक गिलास पानी मांगे ....उस घर में एक गिलास पानी हो भी की नहीं ........

अब अंत में ये बता दें ....की क्षमा करना पर ...आम आदमी पार्टी ....मोहर लगी ....पानी की टंकी तो नहीं भेज पाएगी ...पर हाँ अगर आपने समझा और सहयोग किया ...तो पाइप से पानी आने लगेगा ....
फिर बच्चे ..स्कूल भी जा सके ...और जनता सफाई की बात भी कर सके ......

यही तो न नेताओ की चाल है ....की पहली और सबसे बड़ी परेशानी को ही ...कभी ख़त्म ना करो .....जनता उसी में अटकी रहेगी ...कभी नहीं पूंछेगी ....की स्कूल क्यों नहीं ....सफाई क्यों नहीं ....अस्पताल ..बिजली सड़क क्यों नहीं .....

स्वराज ......स्वराज ही वह व्यव्यस्था है ....जिससे जनता ....अपनी समस्याओं का समाधान खुद कर सकती है ......किसी की पानी की टंकी के इंतज़ार और किसी नेता पार्टी के अहसान के बिना ......नागेन्द्र शुक्ल
#DelhiDeservesBest
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Sunday, July 14, 2013

ये व्यक्ति नहीं व्यवस्था का दोष है की आज आप ...

ये व्यक्ति नहीं व्यवस्था का दोष है की आज आप ...
अगर बाबा बन गए ...तो ढोंगी खुद बा खुद हो जायेंगे,...
नेता बन गए तो ...करप्ट हो जायेंगे ...
टीचर बन गए तो ...बिजनेसमैन हो जायेंगे ..
बिजनेसमैन हो गए तो .....चोर हो जायेंगे .....
जब तक ये गड़बड़ व्यवस्था ना बदले ....तब तक कुछ भी करके ....आप अपने बच्चे को एक कामयाब तो बना सकते है ....पर इस व्यव्यस्था के चलते ....उसे संस्कार नहीं दे सकते ....
और फिर बाद में आपको दो बातो पर दुःख होगा ....
एक की ...बच्चा संस्कारी नहीं बन पाया ...जबकि आपने पूरी कोशिश की थी ..
दूसरी की ...जब सही समय था ...तब अगर इस लडाई में उतरे होते ...शायद व्यवस्था बदल जाती ....मौका थ छूट गया ...
तो दोस्त, अब चुप मत बैठो ...उठो ,..जुडो ..लड़ो ...जीतो ...और व्यवस्था को बदल दो .....
जरुरी है दोस्त ....नागेन्द्र शुक्ल

Tuesday, July 9, 2013

.20 बहन और 25 भाई .....

दोस्तों, मैं वाकई काफी चिंतित रहता हूँ ...आज के समय में युवाओं की दिशा देखा कर ...हम सभी अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए बड़े जागरूक है ...पर अपने कर्तव्यों के लिए काफी उदासीन ....क्यों ?....

क्योंकि हमारे देश की व्यवस्था ही कुछ ऐसी बनाई जा रही है ...की आप सिर्फ स्वयं के बारे सोंचे ..खुद में केन्द्रित रहे ...समाज और देश के बारे में सोंचे ही नहीं ...
हमारी सरकार, शिक्षा , मिडिया , नेता सभी ...बस लगे रहते है ..आपको अपने ही अन्दर व्यस्त रखने में ....
मुझे दुःख होता है ...हमारे देश की ऐसी दिशा देख कर ...

मुझे याद है की ...की कक्षा एक में .....एक टीचर ने मुझसे सवाल किया था ...की तुम कितने भाई बहन हो ....तो पता है ...मुझे करीब 10 मिनट लगे थे ...गिनने में ....
10 मिनट के बाद ...उत्तर दिया ...20 बहन और 25 भाई .....
टीचर हैरान ....उसने पूंछा नाम बताओ ...
तो मैं गिनाने लगा ...रोली दीदी, पूजा दीदी , .....
पता है ...उस समय मुझे ये पता था ...की हर वो कोई ....जिसे मैं ..दीदी कहता हूँ ....और हर वो कोई ..जिसे मैं भैया (दादा) कहता हूँ ...पूरे गाँव और पूरे मोहल्ले के ....वो मेरे भाई बहन ही तो है ....
और आज भी ....मुझे यही लगता है ...की मेरे भाई बहन की संख्या ...गिनती करना ..बहुत मुश्किल है ....
और ख़ुशी इस बात की ....ऐसा करते समय मैं गलत नहीं ...वो ख़याल भी ठीक वैसे ही रखते है ....

पर चिंतित रहता हूँ ...की मेरे बचपन के गाँव और मोहल्ले में तो ...ऐसा था .....पर अब मैं ऐसे किस मोहल्ले में रहूँ ..जहाँ कुछ ऐसा ही महसूस कर सके ...मेरे बच्चे ?.....
कहाँ जा रहे है हम ....या ये कहें की ...कहाँ भेजे जा रहे है हम ......
ऐसा नहीं है ...की हम जा रहे है .....सच ये है ...की हमारी शिक्षा, सरकार, राजनीति, फिल्मे, TV के नाटक, नेता, राजनीति ....अरे पूरी व्यवस्था ही .....तोड़ रही है हमें .....
ताकि हम अकेला .....
अकेला ...महसूस करे ....असुरक्षित महसूस करे ...और इन भ्रष्ट लोगो से ....इनके गुंडे चमचो से डरते रहे ...उनके सामने खड़े होने की हिम्मत ही ना जूता पाये ....

इन्हें आपको ...लूटना है ....इसीलिए ये सिर्फ आपको तोड़ने की राजनीती करते है .....जोड़ने की नहीं ...इनकी हर बात में ....आपको तोड़ने की मनसा साफ़ साफ़ जाहिर होती है ....

और वो कहते है ना ....जैसा राजा वैसी प्रजा ....तो ठीक वैसा ही हो रहा है ....
UP के एक मंत्री को ...महिला नहीं ...चूजे चाहिए ...
MP के वित्त मंत्री जी ....राघव जी ......शर्मनाक है ....सिर्फ ये ही नहीं ..कितने - कितने नाम ही ऐसे ..पर छोड़ो ..गंदे लोगो की बात क्या करना ....

पर एक बात बताओ ...इन घटिया लोगो चुनता कौन है? .....और क्यों ?....
पर आप भी क्या करते ...आपके पास राईट तो रिजेक्ट या रिकॉल तो है नहीं .....और ये सारी पार्टी टिकट ही देती है ..ऐसे गंदे - गुंडों को ....तो क्या करते आप ....

पर अब ऐसा नहीं है ....है ना आपकी अपनी पार्टी ....जो देती है ..टिकट उसे जो आपके हिसाब से सही है ...
तो अच्छी बात या है ...की अब आपके पास रास्ता है ....और ये जरुरी भी है की ...आप राजनीति में खुद उतरे ...सक्रीय भूमिका निभाए ....और लड़े उस व्यवस्था के लिए ....जो आप चाहते है .....नागेन्द्र शुक्ल
संभलो की सुयोग

Sunday, July 7, 2013

AAP के कार्यकर्ता ....इधर बोर्ड लगाते है ...उधर ये सरकारी विभाग .

तो निकलो बाहर मकानों से ....और जंग करो बेइमानो से ....
लगाओ पोस्टर, बैनर होर्डिंग्स ...अपने घर और दुकानों में ....
संपर्क करे ....08588833486, 9212472681 पर ...
दोस्तों, दिल्ली  की सडकों में घूमने से ऐसा प्रतीत होता है ...की दिल्ली में सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस ही चुनाव लड़ रही है ...क्यों ?....
क्योंकि दिल्ली में सरकारी मशीनरी ...ने अपने कृत्य से दो बाते तो साफ़ जाहिर कर दी है पहली ये की .....दिल्ली में अब बीजेपी और कांग्रेस पूरी तरह से,... खुल कर मिलझुल कर आपकी पार्टी आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ रही है ...

दिल्ली में दो संस्थाएं है ..एक PWD और दूसरी नगर निगम ...PWD पर कांग्रेस का कब्ज़ा है  और नगर निगम बीजेपी के कब्जे में है ..अब आप दिल्ली में ..चाहे नगर निगम वाली सडकों में घूमे या PWD वाली सडको में ...पर बोर्ड दोनों के बीजेपी और कांग्रेस के दिखेंगे ..पर AAP के नहीं .....हालात ऐसे कर रख्खे है ....की

AAP के कार्यकर्ता ....इधर बोर्ड लगाते है ...उधर ये सरकारी विभाग ...सिर्फ AAP के पोस्टर्स बैनर्स होर्डिंग्स को ढूंढ - ढूंढ कर उखाड़ रही है ....जबकि वहीँ उसी जगह लगे बीजेपी और कांग्रेस के प्रचार सामग्री को नहीं छेड़ते ...चाहे PWD की सड़क हो या नगर निगम की ....

इस बाबत जब अधिकारी और मंत्री से बात की गयी तो ..उन्होंने कहा की ...आप अपने तरीके से राजनीती करो ..हम अपने तरीके से काम करते आये है...राजनीति करते आये है...और करते रहेंगे....

दूसरी तरफ ...जब ट्रांसपोर्ट मंत्री से कहा गया की ...भाई ...ऑटो में लगे पोस्टर क्यों हटवा रहे हो ....
जबकि इस मामले में तो ...हाई कोर्ट ने अपना रुख साफ़ किया है ..की ऑटो में ..पोस्टर लगेगा या नहीं ...लगेगा तो किसका ....
इसका फैसला सिर्फ ऑटो का ड्राईवर ही करे ..और इस बात पर कोई चाललं नहीं किया जाना चाहिए ....

तो ट्रांसपोर्ट मंत्री से बोल गया ...की क्या ऐसा करके आप ....कोर्ट की अवहेलना नहीं कर रहे है ...तो ट्रांसपोर्ट मंत्री का जवाब था ...की हाँ कर रहे है ...और खुले आम कर रहे है ...जाओ जा कर ..कोर्ट में शिकायत करो ...क्या कर क्या लोगे ....पुलिस तो हमारी है ....

तो दोस्तों, कुछ ऐसे हैं ...दिल्ली के जमीनी हालात ...पर एक बात बतायें ...की फिर भी दिल्ली में हमारी - आपकी शानदार जीत तय है ...क्योंकि जनता हमारे साथ है ....

आज की ही बात है ...ऑटो में बैठा था ...एक दूसरा ऑटो वाला रेड लाईट पर बगल में रुका ..सर पर लगी टोपी देख बोल ....सर कोई पोस्टर हो तो दे दो ...सालों ने पिछले चौराहे पर हटा दिया ....मैंने कहा भाई पोस्टर तो अभी नहीं है ....तो वो ऑटो वाला बोला ...कोई नहीं ...सर ...पोस्टर तो हमारे दिल में है ....और इस बार 10 - 15 पोस्टर ऑटो में ही रख लूँगा ...ये इधर उखाड़ेंगे ..में उधर लगाऊंगा ....चाहे जो हो जाए ...पर सबको आप के बारे में बताऊंगा ....जय हिन्द ...लाइट ग्रीन हो गयी ...और चल दिए दोनों अपने - अपने रस्ते .....

यहाँ से रास्ते तो अलग हुए पर ..मेरी और उसकी मंजिल एक रही .....व्यवस्था परिवर्तन की ...एक ही उद्देश्य की ..इस भ्रष्ट राजनीति को अब बदलना ही है ....चाहे जो करना पड़े ....

तो दोस्त, जब सडक पर ....PWD और नगर निगम की मर्जी चल रही है तो ...
तो हमारे घर, दूकान, कार, मोटर साइकिल, कपडे में ..तो हमारी ही मर्जी चलेगी ....वहां तो कोई PWD या ट्रांसपोर्ट मंत्री कुछ नहीं कर सकता,....वहां तो हम जब चाहे ...जिसका चाहे पोस्टर होर्डिंग लगा सकते है ....

तो निकलो बाहर मकानों से ....और जंग करो बेइमानो से ....
लगाओ पोस्टर, बैनर होर्डिंग्स ...अपने घर और दुकानों में ....
संपर्क करे ....08588833486, 9212472681 पर ...

ये कुछ भी करके ....जीन नहीं सकते ...आपसे और हमसे ...अगर हम साथ है ....वैसे हम राजनीती कर नहीं रहे ...अभी तो हम बस इनकी ...पर्दे के पीछे की गन्दी राजनीति को पर्दा हटा कर दिखा रहे है ....नागेन्द्र शुक्ल #DelhiDeservesBest