Wednesday, October 17, 2012

..आम आदमी...निर्जीव है, बैंक है........वोट बैंक हैं..

अरविन्द जी, कहते रहते हैं कि .........बीजेपी और कांग्रेस ....दोनों एक साथ है....एक ही थाली के चाटते बट्टे है.......और ये दोनों ही बताते रहते हैं कि...... अरविन्द जी, उनके नहीं .....बल्कि प्रतिवादी के एजेंट हैं.......
आज मुझे समझ आया ...बीजेपी और कांग्रेस के ...वक्तव्य में थोड़ी थोड़ी तो सच्चाई है .....
हलाकि अरविन्द जी, कि बात में कोई........ शक  शुबा नहीं.......परन्तु ......
हाँ इनमे भिन्नता है......वो भिन्नताएं ...साफ़ है.....
1  कांग्रेस के मंत्री....NGO बना कर ...देश को लूटते हैं........तो बीजेपी के अध्यक्ष....को-ऑपरेटिव बना कर.........हाँ अंतर तो है.........

2 इनके savings accounts ......(हाँ वोट बैंक ).......भी अलग हैं....जिनके दम पर .....ये खुलेआम लूटते है............जिसके  पास ........जितना पक्का........वोट बैंक .......वो उतना ही ज्यादा निरंकुश....और बर्बर.......सही है...

हम आम आदमी भी तो कुछ ऐसा ही करतें है....
पहली तारिख को ...जब तनख्वाह ...आती है...तो शुरु के 10 /12  दिन तो हम भी ....राजा हो जातें है........बेपरवाह हो जाते है......निरंकुश हो जाते है.......फिर
जैसे - जैसे ....saving accont ....कमजोर होता जाता है...........नैतिकता याद आती जाती है.........
कोई काम करने से पहले ....थोडा सोचना शुरू......कर देते हैं......फिर 20 ...आते - आते ...
हमारा दिमाग कितना काम करने लगता है..........जरुरी...गैर जरुरी...का विचार .....करने लगता है.....और क्या - क्या  सोंचने लगते  है......फिर 30 ......के कुछ पाहिले.......

क्रेडिट कार्ड कि याद आती है ......ठीक उसी तरह.............जैसे........
इस BJP और कांग्रेस को ...........ममता - समता और मुलायम .....कि याद आती है........और फिर ...उधार कि व्यवस्था चलती है..........

अब सोचने कि बात ये है.........कि इनमे........या यूँ कहें कि .......हममे....ये ताकत आती कहाँ से है...........जनाब.....
अब तो साफ़ है........बैंक से ..............हाँ - हाँ....वोट बैंक से.........

तो ...अब रास्ता साफ़ है...........इनको.....सबक सिखाने का.........हमला करो......इनके बैंक पर.......जी हाँ.........मेरा मतलब है ....वोट बैंक पर.......
ये वोट बैंक है कौन............अरे भाईयो.............ये सभी को पता है .............हम और आप........

वैसे अगर विचार करें......तो ये हमें...बैंक ...वोट बैंक .....समझते..क्योँ है...........ये हमारी ही गलती है........जो हम....बे वजह......बिन कारण......इनके पीछे चिल्लाते हैं.........
नेता जी ...आगे बढ़ो......और हमको लूटो.......
अबकी बारी.......................तुम्हारी बारी..........

दोस्तों मुझे....दुःख है.......कि सिर्फ....और सिर्फ .......
वोटिंग लिस्ट ......को ...दिल्ली में देख कर.....फिर ये सोच कर .....कि किस ...धर्म...और किस जाति ......का........
बल्लेबाज .....किसने उतारा....है ......उसी हिसाब से......ये अपना......गेंदबाज़....उतार देते है.........

यह तो ...हम ...आम आदमी ...हैं......जो जाति....और धर्म के बारे मैं बात करतें है ..........ये पोलिटिकल (राजनीतिक ) अंडर वर्ल्ड (गुर्गे )........तो सिर्फ वोट बैंक कि बात ही करते हैं ||
बेवकूफ बनातें है ........बेवकूफ.........

और जनता..............
तो जनता है............
जीते कोई भी.........हर बार चुनाव......
पर चुनाव ....से पाहिले ही हार जाती है........

ये ठीक उसी तरह ......प्रतीत होता है ..................
जैसे मैदान में ...........सिक्का उछाला..................और बस .....मैच खत्म.........
कौन जीतेगा...बता दिया......क्योँ और कैसे.....अरे जनाब ...अब मैच का नहीं.......मैच फिक्सिंग का जमाना है......

चुनाव राजनीती का नहीं ...........किसी मुद्दे का नहीं ...........किसी विचार धारा का नहीं.............
बस .......कहीं............. किसी जाती का ............तो...
कहीं किसी ......धर्म का है ...........

और इस .....राजनीतिक ......नाटक का........सूत्रधार.....कहानी लिखने वाला.......जी जनाब......एक व्यापारी है .....व्यापारी ही है..........

और एक सफल .................व्यापारी कभी ....एक ही जगह .....पैसा नहीं लगता.........प्रतिशत...में बाँट कर........अलग - अलग ......पैसा लगता है..............

यही कारण है ...........चुनाव कोई भी हो ...............जनता हारती है .........
बस ये ....नेता / व्यापारी ..........जीत जाता है............क्योँ जीत जाता है ...........

क्योँकि ..........हम इन्शान नहीं...........निर्जीव है, बैंक है..............वोट बैंक हैं..................
हमें..............वोट बैंक ............कहा जाता है..........
वोट बैंक ............कहा जाता है..........
अरे.......दोस्तों.........क्या अच्छा लगता है ..............आपका पता नहीं .............
पर हमें नहीं ..............भाता है ...........
जब हमें.........वोट बैंक ............कहा जाता है........

मैं आज ये नहीं कहूँगा........कि अरविन्द जी, को जिताना है......पर मुझे इतना ही कहना है........कि
अब हमें वोट बैंक नहीं रहना है......
हम भी सोच सकतें है................हम भी बोल सकतें है........और अब .................
हम मुंह खोलेंगे..............अब हम बोलेंगे.............हम कौन............आम आदमी......
...................नागेन्द्र शुक्ल


लोकपाल को थाम .....हाथ में........है अपना कदम बढाया ||

एक दिन मैंने ..........बड़ी मुश्किल से ,,,,,,,
संसद के सामने से गुजरने कि............हिम्मत जुटाई |
तभी एक प्रहरी चिल्लाता है, .........तू किधर से आया.....
यहाँ सिर्फ चुना हुआ......प्रतिनिधि आता है ||

यह प्रतिबंधित क्षेत्र ......कहलाता है |
इसका ना कोई........आम आदमी से नाता है ||

उसने टेढ़ी नज़र दिखाई.........
बात मेरी समझ में.....आयी....
मैंने तुरंत 500 कि हरी .....पत्ती दिखाई ||

प्रहरी कुछ सकुचाया..........मैंने उसे समझाया |
जो भी यहाँ आता है ...........
खाता और खिलाता है ........
तू बेकार में सकुचाता है ||

मैं बोला ....धीरे ने नोट ....दबा ....और आगे का रास्ता बता |
फिर क्या...........मैं आगे बढ़ गया ........भाई,
तभी एक कराह दी.............. सुनाई ||

मैंने पूंछा.......
तू कौन है .....क्योँ रोता है ||
वो बोला,
मैं हूँ ...............संसद.....
राज जहां से चलता है.......
देश जहां से ......बनता और बिखरता है ||

पाहिले था, मैं लोकतंत्र का मंदिर......अब तानाशाहों .....का अड्डा हूँ |
जो मेरी एक नहीं सुनतें है ...........मैं भर - भर के रोता हूँ ||

पर तू कौन......तुझे क्योँ........ अपना दुःख बतलाऊँ ?

मैं बोला .......मैं आम आदमी.....
सुनते ही ....संसद चिल्लाया....
कब से था .........तेरा इंतज़ार....
ये बता.......क्योँ .....भेजते हो तुम अपराधी...गुंडे और भ्रस्टाचारियों  को.......
ये करतें है .....मेरी इज्ज़त .........तार तार .....एक नहीं........ बार बार ||

मैं बोला ...देर से आया हूँ .................पर दुरुस्त आया हूँ |
तेरे लिए एक अच्छी ..............................खबर लाया हूँ ||

वो बोला क्या ....अच्छी ....खबर...
मैं बोला ......हाँ
कोई है जिसने, इन तानाशाहों ...को है ललकारा......और है खूब छकाया |
लोकपाल को थाम ..........हाथ में....................है अपना कदम बढाया ||
गर जनता ने ...........उसका साथ निभाया......तो समझो कल ही आया |
और फिर बस....................................................... लोकपाल आया ||
फिर क्या.....सब मिल....
धृतराष्ट को.....................भगायेंगे............
दुर्यौधन...यहाँ फटक ना .....पाएंगे |

अरविन्द को PM .........................बनायेंगे......और
भ्रस्टाचारियों....के लिए ...प्रहरी ...बिठायेंगे ||
तेरे आँगन में..........फिर से लोकतंत्र का.........
मंदिर...................................हम  बनायेंगे ||

बनायेंगे ना ?
क्योँ दोस्तों.....कौन बनाएगा........हम बनायेंगे........
हम कौन........भूलो मत ....आम आदमी................
......नागेन्द्र शुक्ल

Tuesday, October 16, 2012

बीजेपी समर्थकों के लिए ..........

बीजेपी समर्थकों के लिए ..........कुछ ही समय के बाद............अरविन्द जी ........कोई बड़ा खुलासा करने वाले है.......अगर मीडिया कि माने तो वो महानुभाव ......गडकरी जी हो सकतें है.......वैसे मेरी नज़रों मैं गडकरी जी ......तो कभी नेता थे ही नहीं.......सिर्फ एक व्यापारी ही थे ||
नाज़ुक परिस्थिति ..........को भापते हुए...........
हलाकि, BJP  ने अपने हथियार तो पाहिले ही डाल दिए है.....और चिल्लाने लगें है .....ये बताने लगे ...कि वो कांग्रेस से भी कहीं ज्यादा  बेशर्म है................और सुनतें रहेंगे..........कोई  कुछ भी कहें..........
अरे बीजेपी वालों............तुम और कर भी क्या सकते हो..........कोई रास्ता ही नहीं आपके सामने.........अपनी बची कुची इज्ज़त को ढकने कि कोशिश के लिए ...........अगर कुछ उल्टा सीधा बोल दिया तो ......कांग्रेस से भी बुरा हाल करेंगे ||
चलो सही है, दूसरों से जैसे भ्रस्ताचार सिखा था .........बेशर्मी भी सीख ली ...........

अरविन्द जी, ने सच ही बोला था...........कि दोनों......दोनों नहीं तकरीबन सभी मिलें है..........विपक्ष सिर्फ और सिर्फ आम आदमी है ........और कोई नहीं ||
हालात ये हैं कि ...........ईमानदार सिर्फ और सिर्फ वो ही बचा है ......................जिसे बईमानी का मौका नहीं मिला.........सच है ...........

मैं बिना किसी हिचक के.....यह बताना चाहता हूँ कि......मैं उस दिन तक, जिस दिन तक अन्ना ने अरविन्द जी को ........समर्थन  देने से मना किया था..........
BJP का ही समर्थक था.....वो इसलिए  नहीं कि मैं बीजेपी कि किसी ideology को मानता था.........उसका कारण सिर्फ एक और एक ही था.......और वो मेरी सोंच .....और किसी बेहतर ....विकल्प का उपस्थित ना होना.....
मुख्या रूप से दो ही बातें थी जो मुझे बीजेपी से जोड़ देती थीं.......
1 . मैं पूरी और पूरी तरह से regional पार्टी के खिलाफ था .
2 . मैं कांग्रेस का ....धुर विरोधी था....और हर उस पार्टी का .......जिसमें एक ही व्यक्ति कि चलती हो ......चाहे वो कोई भी हो.....वो पार्टी जिसमें खुद लोकतंत्र नहीं .....वो क्या समझेगी लोकतंत्र क्या है....
बस ये ही दो मुख्य कारण थे |
परन्तु मन मैं ......हमेशा से अन्ना जी और अरविन्द जी के लिए सम्मान था.......जिस दिन तक अन्ना ने अरविन्द जी को  ........समर्थन  देने से मना किया था.........
उस दिन लगा ......कि जैसे सच्चाई मर रही. है .........और बस सोच लिया .......अब अगर अरविन्द जी, का साथ नहीं दिया तो ......ना ही देश का कर्ज उतरेगे ..................ना ही धर्म का..........और आत्मा हमेशा कचोटती रहेगी......एक घुटन होगी.......
और बस कूद गया .....पूरी ताकत और जोश के साथ.........सच बोलूं तो ............इतनी संतुष्टि ......कि अनुभूति पाहिले कभी नहीं हुई थी .........कसम से लगा रहा है ...........जीवन काम आ गया.....

मेरे कुछ ख़ास दोस्तों ने ......सुरुवात मैं मैं मुझे समझाने कि काफी कोशिश कि.........
कई तर्क भी दिए......बहुत सवाल पूंछे....जिनके उत्तर शायद अभी तक नहीं दिए मैंने .......छमा करना .....पर अब सिर्फ अरविन्द जी के समर्थन के सिवाय कुछ सोंचने कि शक्ति नहीं रही.......
कई ने तो ये तक बोला कि ...................अरविन्द जी, समर्थन करके.......तुम कांग्रेस का समर्थन कर रहे हो......एक बार तो लगा कि शायद ...सही बात है .......परन्तु आत्मा ने इतना ....धिक्कारा इतना धिक्क्कारा...कि अपने आप को रोक नहीं सका.....
मैं आपको ये कहानी इसलिए बता रहा हूँ क्योँ कि मुझे ऐसा लगता है ....कि जिस मनोदशा ....मैं मैं था ......हमारे कई कई ....दोस्त अभी भी है .......हो सकता है कि ....इस कहानी से अपना फैसला लेने मैं मदद हो ||

मैं अनुरोध करता हूँ ...................बीजेपी के उन सभी समर्थकों से जो अभी भी किसी भी प्रकार कि दुविधा मैं है
...........एक बार ईमानदारी से विचार करें - अति कृपा होगी ||
और मेरा पक्का वादा है .....कि आपका आत्म सम्मान ............अपनी ही नज़रों मैं कई कई गुना बढ़ जायेगा || इसे महसूस कर के देखो ||
...........अगर अच्छा ना लगे तो माफ़ कर देना.......प्रशन मत करना ...........मैं उत्तर नहीं दूंगा ..........सलमान खुर्शीद कि तरह..........हाहाहा.......
..........एक बीजेपी का पूर्व समर्थक ............नागेन्द्र शुक्ल

Monday, October 15, 2012

संसद मार्ग से धरना समाप्त.....हमारा असर....

दोस्तों, ....कल अरविन्द जी, ने संसद मार्ग पर अपना ....धरना....समाप्त किया.....तो कुछ ज्ञानियों के मुंह से निकला कि.....इनकी आदत है ....छोड़ देने की.
हम आप से ......पूँछना चाहतें है ......क्या ये ज्ञानी ....सही हैं ?
आप अपने विवेक से सोचो........मेरा तो उत्तर .......सिर्फ ना है ? अरविन्द जी....ने हिम्मत दिखाई .........उन्होंने हमें साहस दिया ......लड़ने का और बोलने का....
इसका ...फर्क साफ़ है........हरियाणा के IAS अफसर अशोक खेमका जी .....ने 21 सालों में 40   तबादलों का ......सचिन तेंदुलकर जैसा .................कीर्तिमान बनाया है .......
और जनता को ये बताया है की ........सरकार के दामाद को ....................दलित की जमीन कैसे दी गयी........और.......
फिर जा कर ४१वे ....का विरोध किया......................और बिना किसी डर और जिझक  के  बोंले ............"अब पानी सर से ऊपर जा रहा है " .............
बोलना ही पड़ेगा.....हमारा सलाम है इस ......अफसर को.....और मेरा समर्थन भी.......
आपका ?
ये चिंगारी तो अशोक खेमका जी....के अन्दर हमेशा से रही होगी...........पर हवा किसने दी .......कौन है वो ?....आप सोंचों......और बोलो ||

अरविन्द जी, ने हममें ....अब इतना साहस भर दिया है कि........अब हम नहीं रुकने वाले.....आगे और आगे ही बढ़ेंगे........
अब हम राजनीती कर रहें है ........हाँ हम राजनीती कर रहें है ......अब दुबारा मत पूँछना........(कुछ याद आया क्या ?).....

अब हम आगे बढ़ेंगे ........जिस लोकतंत्र की ये हत्या कर चुके है........और जब डर जातें है ................तो उसी के शव (लाश) .......के पीछे जा कर चुप जाते है............और इस लाश को ढाल बना......पीछे से चिल्लातें है ||

पर अब हम समझ गए हैं इनकी चाल .........अब हम नहीं फंशने .......वाले......
अब हम आगे बढ़ेंगे .........इस लाश में........जान फूंकेंगे........लोकतंत्र को पुनः .....जिन्दा कर.......पूरी ताकत से स्थापित करेंगे......और इतनी ताकत देंगे कि.....फिर कोई इसको .......घायल तक ना कर पाए ||........

करेंगे ना ? ........इससे बेहतर ....दूसरा....अवसर नहीं आएगा ||

रही बात सलमान जी, के इस्तीफे कि..........तो अब हम ऐसे लोंगों को............किसी भी ऐसे पद पर ही नहीं आने देंगे.......कि हमको इन् जैसों  के सामने ......कुछ माँगना पड़े....कुछ भी .......माँगना पड़े ||
और राबर्ट बदरा जी ..............उनके लिए ...तो अब अशोक खेमका जी....ही काफी होंगे......
होंगे जरूर होंगे.......अगर हमने.........साथ दिया......देंगे ना ?

और अरविन्द जी, हमारे सेनापति.........अरे कल 17 तारिख है..........17 ......अब अगले को पकड़ेंगे.......और करेंगे जनता के हवाले.......अरविन्द जी ...आप एक एक कर के बताते रहो.......बस....
और सबक तो हम सिखाते रहेंगे.........क्योँ दोस्तों ....सही कहा ना ......

अब सबक हम सिखायेंगे..........हम कौन...........आम आदमी..........
.........नागेन्द्र शुक्ल.

...क्या बात है.............क्या सरकार चलतें है .............

आज अरविन्द जी, ने बहुत सारे नए तर्क दिए...और ये सिद्ध किया की ....सलमान जी झूंठे है...........
ये सिर्फ उनके लिए थे ....जिनको अभी भी जरा सा विस्वास बचा है या उनके चमचे......या गुलाम है.......
हमें तो अब कुछ नहीं सुनना..........हमें पक्का पता है.....

अरविन्द जी ने बहुत....कुछ बताया..........माफ़ कीजिये .......पर सिर्फ एक ही बात याद रही.....की

NGO , ने कुछ लोग जिनके .........पैर में दिक्कत थी ...उन्हें .....कान की मशीन दी.....क्योँ भाई ...क्योँ दी कान की मशीन.......
कई कारण है.......
१. एक तो ये सरकार........सुनने में नहीं ........सिर्फ सुनाने में ही विस्वाश रखती है ........और बोलने नहीं देती.....
पर अब हम बोलेंगे......अपना मुंह.....खोलेंगे....
तुम सुनो ना सुनो .....अगले चुनाव में.......तुम्हे...सुनाने लायक ....नहीं छोड़ेंगे.......
ये तो पक्का है ...............पक्का है ना दोस्तों...?
२. इसमें .....हमे कुछ ख़ास ......आश्चर्य नहीं हुआ ............क्योँ भाई...क्योँ नहीं ?
वो इसलिए ....क्योँकी ...जिस सरकार के ये मंत्री है ......और जिस परिवार के संतरी.........
उनके काम करने का तरीका............ही यही है............
कुछ मत सुनो......किसी की मत सुनो......
ठीक है भाई........मत सुनो.......क्या कर सकतें है .......आपकी मर्जी.....आपके संस्कार........

हम बोलते ही कब थे............हमें...अभी हाल ही में तो .....मुंह मिला है.........
जबसे हमें ........................................................अरविन्द मिला है.............
अब हम बोलेंगे......अपना मुंह.....खोलेंगे.........
तुम बोलते रहो .........चिल्लाते रहो......................हम कान से बहरे हैं.........
तुम्हारी ................नहीं सुन सकते...................
तुम किसी को भी .............कितनी भी.........कान की मशीन .....बांटो....
और अब हमें........चाहे जितना........डाटो.............
हम नहीं सुनते....हम नहीं सुनते........
अब हम बोलेंगे......अपना मुंह.....खोलेंगे.........

३. और प्रमुख कारण..............इनकी सरकार भी तो यही करती है.........
मांगो पीने का पानी .......तो चौराहे पर .....फाउनटेन.......लगवातें है.............
क्या बात है......क्या सरकार चलतें है.......
बोलो की महंगाई ......बहुत है .......तो.......दारू के दाम घटातें है.........
क्या बात है......क्या सरकार चलतें है.......

गर कोई बोला........समर्थन.....वापस लेतें है .......तो .........CBI के ...केस खुल जातें है .......
क्या बात है......क्या सरकार चलतें है.......

जीतने के लिए चुनाव.......पैसा बहुत बहातें है............ना जाने कहाँ - कहाँ .....से ले कर आते है.....
जितने के बाद......जिनसे लिए थे पैसे.......उनके पैर...दबातें है ......
अरे क्या ......बोलूं........दलाल बन जातें है...............
क्या बात है.............क्या सरकार चलतें है .............

आने दो 2014 ..........हम तुमको...बतातें है.........
अभी थोडा busy हैं ...............रुको.....हम अब संसद आतें है........
और बताते है .......................कैसे सरकार चलतें है.........क्योँ दोस्तों.....
बताएँगे ना......इनको सबक सिखायेंगे ना.....?


लगा दो इतना जोर.........मचाओ इतना शोर........कि..........

बिन मशीन के हम सुनने लगें...............और अपना मुंह .........खोलने लगें......


.........पर मत भूलना .........हम कौन............आम आदमी......
..........नागेन्द्र शुक्ल


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Sunday, October 14, 2012

अब हम नहीं सुनते........अब हम बोलेंगे...

सलमान जी ...अपने अहंकार के चलते......आज आपने फिर से  क्या बोला......
बोला की ...अरविन्द जी 3rd grade के सड़क पर चलते फिरते लोग है .....
जानाब ....हम 3rd grade के सड़क पर चलते फिरते लोग.............ने ही गलती से तुमको नेता बना दिया......
भारत की जनता को समझते नहीं ......और ऑक्सफोर्ड में मिले सम्मान को ....गिनाते हो....
जनाब अब वोट भी उन्ही से लेना.....क्योँकी अब हम.... 3rd grade के सड़क पर चलते फिरते लोग.....हमारे घर मत आना....

अब हम, सिर्फ 3rd grade के लोगो को ही अपना सेनापति बनायेंगे.............एक सलाह है आपको .......अगर इज्जत बचानी है ....तो चुनाव में खड़े भी मत होना...... नहीं तो .......जमानत ...तक जब्त करा देंगे ......
ट्रेलर तो आप देख ही चुके हो ......लुइस जी का कौन सा नंबर आया था ...आप को बेहतर पता होगा .....
अरे कल ही तो बात है ...आपही के CM  ....के बेटे का क्या हाल हुआ......शायद आप landon में थे पता नहीं होगा .....पता कर लेना.....
और हाँ ....किसी तरह से आपके ...संकट मोचन के ...बेटे का संकट ...टल गया ...कोई बात नहीं ......अभी बहुत कुछ बांकी है .......

अब बीजेपी, की बात करतें है ......इनकी  ..स्थिति भी ....साफ़ नहीं दिखाई ..देती.....
या ये बोलें की ..साफ़ नज़र आती है ........की ये आप के सहयौगी है ....और जनता के विरोधी है ......

कांग्रेस और bJP  दोनों के पास अब ...कोई जवाब नहीं बचा....इनके सारे हथियार ..बेकार हो गए है ....
बस अब ...बेशर्मी....और बर्बरता ही बची है ........इनके पास......
हम कहना चाहतें है ......आप दोनों से .....अब आप को कोई नैतिक ...आधार नहीं ...बचा.....
अब हम आप की नहीं सुनते......
अब हम मैदान में उतरें है .....और बोल रहें है .....अभी चिल्ल्लायेंगे....और फिर दहाड़ेंगे .....
अब तुम बोलते रहो .......हम नहीं सुनते .....क्योँ.......... ...
क्यूंकि हम जानते है ...तुम झूठे हो.....

अरे इसमें बुरा भी क्या है ......क्योँ दोस्तों है क्या?.....
ये शुरु तो आपने ही किया था ....
हम ..अनशन पर बैठे....आप सी विनती की ....आपने वादा किया ...फिर धोखा दिया .....
हम फिर बैठे...........और आप बोंले हम नहीं सुनते ..........

तो जाओ ...जा कर कहीं और अपनी नेतागिरी करो......अब यहाँ नहीं चलेगी .......अब हम कहतें है ..कि
अब हम आप की नहीं सुनते......

वैसे आप के पास बोलने के लिए कुछ है भी नहीं .....
झूंठे ..दस्तावेज ...दिखाते हो .......ऊपर से डराते हो .......हम क्योँ सुने .....अब हम आप की नहीं सुनते......

अब अंत में हम ये बताना चाहते है ...की आप ने आज बोला ....
"I will See you In court "……दोस्त  अब हम  बोलतें  है ….we will see you on road…..
क्योँ भाइयों .............सही कहा ना ?
आप नाली के कीड़े बताते हो......अब हम बताते है की ...आप क्या हो....
आप पाहिले तो नेता हो ..........
ऊपर से ......अहंकारी.........अरे हिटलर ...हो .......
अब हम नहीं सुनते........अब हम बोलेंगे......हम कौन.......आम आदमी ............
------------नागेन्द्र शुक्ल

Saturday, October 13, 2012

मम्मी जी.....ये तो राजनीती कर रहे है..!!

न्यूज़ चंनेल्स पर....तक़रीबन सभी एंकर...बोलतें है कि आप राजनीती कर है है.....
और अरविन्द के साथी....बार बार....पूरी जिम्मेवारी और सिद्दत के साथ स्वीकार करतें है ...
........
और कहतें है की हाँ ..."हम राजनीती कर रहें है" फिर भी पूंछा करते है.....
अरे मेरे मीडिया के ज्ञानीयों..............और जनता के विपक्षी नेताओं.......
कितनी बार बोले......हाँ "अब हम राजनीती कर रहे है"......और पूरी ताकत से साथ बोलने के आलावा हम....इनको ये याद दिलाना चाहतें है और पूँछना चाहतें है की
मजबूर किया किसने ?
हाँ, हम कर रहें है राजनीती........और राजनीती ऐसे ही होगी......तुममे है हिम्मत तो ......तुम भी कर के दिखाओ ?
अब जनता जाग गयी है......और ऐसी जागी है की .....तुमको भी सोने नहीं देगी |
तुमको हम ...सिद्ध कर चुके है कई बार कर चुके है की तुम .......
झूंठे हो .........भ्रस्टाचारी हो.....आत्याचारी हो......नैतिकता विहीन ......और व्यभिचारी हो ......
अब क्या क्या बोंले......आप नेता हो...बस बोल दिया.......
और ये हम कौन ?......अरे जनाब भूल गए..........आम आदमी
............. - नागेन्द्र शुक्ल